sab yaar the hamrah magar yaar nahin the ham misl-e-zamana kabhi hushyar nahin the har baar tujhe dhundne aae hain yahan tak lekin miri jaan tum yahan har baar nahin the us ki hi mohabbat men gire dost ki jis se ham baat talak karne ko tayyar nahin the ai shaikh na kahna ki maza mai men nahin hai mai-khane men ik tum the jo bedar nahin the phir hijr ki raton ne inhen kar diya aisa ye log azal se hi to mai-khvar nahin the sab yar the hamrah magar yar nahin the hum misl-e-zamana kabhi hushyar nahin the har bar tujhe dhundne aae hain yahan tak lekin meri jaan tum yahan har bar nahin the us ki hi mohabbat mein gire dost ki jis se hum baat talak karne ko tayyar nahin the ai shaikh na kahna ki maza mai mein nahin hai mai-khane mein ek tum the jo bedar nahin the phir hijr ki raaton ne inhen kar diya aisa ye log azal se hi to mai-khwar nahin the
Related Ghazal
किया बादलों में सफ़र ज़िंदगी भर ज़मीं पर बनाया न घर ज़िंदगी भर सभी ज़िंदगी के मज़े लूटते हैं न आया हमें ये हुनर ज़िंदगी भर मोहब्बत रही चार दिन ज़िंदगी में रहा चार दिन का असर ज़िंदगी भर
Anwar Shaoor
95 likes
ज़ने हसीन थी और फूल चुन कर लाती थी मैं शे'र कहता था, वो दास्ताँ सुनाती थी अरब लहू था रगों में, बदन सुनहरा था वो मुस्कुराती नहीं थी, दीए जलाती थी "अली से दूर रहो", लोग उस सेे कहते थे "वो मेरा सच है", बहुत चीख कर बताती थी "अली ये लोग तुम्हें जानते नहीं हैं अभी" गले लगाकर मेरा हौसला बढ़ाती थी ये फूल देख रहे हो, ये उस का लहजा था ये झील देख रहे हो, यहाँ वो आती थी मैं उस के बा'द कभी ठीक से नहीं जागा वो मुझ को ख़्वाब नहीं नींद से जगाती थी उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़्यादा उसे रूलाती थी मैं कुछ बता नहीं सकता वो मेरी क्या थी "अली" कि उस को देख कर बस अपनी याद आती थी
Ali Zaryoun
102 likes
ग़ज़ल तो सब को मीठी लग रही थी मगर नातिक को मिर्ची लग रही थी तुम्हारे लब नहीं चू में थे जब तक मुझे हर चीज़ कड़वी लग रही थी मैं जिस दिन छोड़ने वाला था उस को वो उस दिन सब सेे प्यारी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
80 likes
उस के हाथों में जो ख़ंजर है ज़्यादा तेज है और फिर बचपन से ही उस का निशाना तेज है जब कभी उस पार जाने का ख़याल आता मुझे कोई आहिस्ता से कहता था की दरिया तेज है आज मिलना था बिछड़ जाने की निय्यत से हमें आज भी वो देर से पहुँचा है कितना तेज है अपना सब कुछ हार के लौट आए हो न मेरे पास मैं तुम्हें कहता भी रहता की दुनिया तेज है आज उस के गाल चू में हैं तो अंदाज़ा हुआ चाय अच्छी है मगर थोडा सा मीठा तेज है
Tehzeeb Hafi
220 likes
बा'द में मुझ से ना कहना घर पलटना ठीक है वैसे सुनने में यही आया है रस्ता ठीक है शाख से पत्ता गिरे, बारिश रुके, बादल छटें मैं ही तो सब कुछ ग़लत करता हूँ अच्छा ठीक है जेहन तक तस्लीम कर लेता है उस की बरतरी आँख तक तस्दीक़ कर देती है बंदा ठीक है एक तेरी आवाज़ सुनने के लिए ज़िंदा है हम तू ही जब ख़ामोश हो जाए तो फिर क्या ठीक है
Tehzeeb Hafi
182 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Syed Huzaifa Kaif.
Similar Moods
More moods that pair well with Syed Huzaifa Kaif's ghazal.







