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sab zarurat ka to saman hai ghar men rahiye kya hua gar koi halkan hai ghar men rahiye bhiid men bhi na the siine se lagane vaale aaj to shahr hi viran hai ghar men rahiye saans ghut jaegi divaron ke ke andar ik din aur sunte hain ki darman hai ghar men rahiye band hain mandir o masjid ki dukanen saari aaj bazar ye sunsan hai ghar men rahiye kal talak mulk se bahar jo kiye dete the ab to un ka bhi ye farman hai ghar men rahiye har maraz men nahin hoti hai suhulat itni bhuuk se marna to asan hai ghar men rahiye qaid phir qaid hi hoti hai magar hasb-e-hal sab se behtar yahi zindan hai ghar men rahiye aap dil se mujhe be-dakhl kiye dete hain ab to sarkar ka elaan hai ghar men rahiye us ki tasvir in ankhon ke liye kaafi hai aur phir miir ka divan hai ghar men rahiye sab zarurat ka to saman hai ghar mein rahiye kya hua gar koi halkan hai ghar mein rahiye bhid mein bhi na the sine se lagane wale aaj to shahr hi viran hai ghar mein rahiye sans ghut jaegi diwaron ke ke andar ek din aur sunte hain ki darman hai ghar mein rahiye band hain mandir o masjid ki dukanen sari aaj bazar ye sunsan hai ghar mein rahiye kal talak mulk se bahar jo kiye dete the ab to un ka bhi ye farman hai ghar mein rahiye har maraz mein nahin hoti hai suhulat itni bhuk se marna to aasan hai ghar mein rahiye qaid phir qaid hi hoti hai magar hasb-e-haal sab se behtar yahi zindan hai ghar mein rahiye aap dil se mujhe be-dakhl kiye dete hain ab to sarkar ka elan hai ghar mein rahiye us ki taswir in aankhon ke liye kafi hai aur phir mir ka diwan hai ghar mein rahiye

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तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ

Fahmi Badayuni

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बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं अहद-ए-वफ़ा से किस लिए ख़ाइफ़ हो मेरी जान कर लो कि तुम ने अहद निभाना तो है नहीं वो जो हमें अज़ीज़ है कैसा है कौन है क्यूँँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं दुनिया हम अहल-ए-इश्क़ पे क्यूँँ फेंकती है जाल हम ने तिरे फ़रेब में आना तो है नहीं वो इश्क़ तो करेगा मगर देख भाल के 'फ़ारिस' वो तेरे जैसा दिवाना तो है नहीं

Rehman Faris

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ज़बाँ तो खोल नज़र तो मिला जवाब तो दे मैं कितनी बार लुटा हूँ मुझे हिसाब तो दे तेरे बदन की लिखावट में है उतार चढ़ाव मैं तुझे कैसे पढूँगा मुझे किताब तो दे तेरा सवाल है साक़ी कि ज़िंदगी क्या है? जवाब देता हूँ पहले मुझे शराब तो दे

Rahat Indori

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पागल कैसे हो जाते हैं देखो ऐसे हो जाते हैं ख़्वाबों का धंधा करती हो कितने पैसे हो जाते हैं दुनिया सा होना मुश्किल है तेरे जैसे हो जाते हैं मेरे काम ख़ुदा करता है तेरे वैसे हो जाते हैं

Ali Zaryoun

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सितम ढाते हुए सोचा करोगे हमारे साथ तुम ऐसा करोगे? अँगूठी तो मुझे लौटा रहे हो अँगूठी के निशाँ का क्या करोगे? मैं तुम सेे अब झगड़ता भी नहीं हूँ तो क्या इस बात पर झगड़ा करोगे? मेरा दामन तुम्हीं था में हुए हो मेरा दामन तुम्हीं मैला करोगे बताओ वा'दा कर के आओगे ना? के पिछली बार के जैसा करोगे? वो दुल्हन बन के रुख़्सत हो गई है कहाँ तक कार का पीछा करोगे? मुझे बस यूँँ ही तुम सेे पूछना था अगर मैं मर गया तो क्या करोगे?

Zubair Ali Tabish

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या तिरी आरज़ू सा हो जाऊँ या तिरी आरज़ू का हो जाऊँ मिरे कानों में जो तू कुन कह दे मैं तसव्वुर सा तिरा हो जाऊँ मुझ से इक बार ज़रा मिल ऐसे मैं तिरे घर का पता हो जाऊँ तू भी आ जाना कहीं रख के बदन जिस्म से मैं भी जुदा हो जाऊँ तोड़ कर माटी ये मेरी फिर से यूँँ बनाओ कि नया हो जाऊँ इश्क़ की रस्म यही है बाक़ी मैं भी इक बार ख़फ़ा हो जाऊँ आशनाई है सुख़न-गोई भी और कितना मैं बुरा हो जाऊँ

Vineet Aashna

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माना कि मेरा जिस्म ये जूठा गिलास है लेकिन ये दिल तो आज भी कोरा गिलास है कितनी है कैसी मय है यही बात है बड़ी चाँदी या काँच का सही रहता गिलास है कुछ तिश्नगी भी रखनी थी जानाँ सँभाल के तुम ने हिफ़ाज़तों से जो रक्खा गिलास है पीने का लुत्फ़ है तभी जब ये रहे न इल्म तेरा गिलास है कि ये मेरा गिलास है क़ीमत तो मेरी प्यास की भी कम नहीं हुज़ूर ये और बात आप का महँगा गिलास है तुम को भी इस जहान का आ ही गया चलन पीने के बा'द तुम ने भी फेंका गिलास है मुँह से लगा मैं पी गया बोतल तो शोर क्यूँ शिद्दत की प्यास को कहाँ मिलता गिलास है दुनिया का मैं ज़रूर हूँ पर शाम ही तलक फिर उस के बा'द तो मिरी दुनिया गिलास है

Vineet Aashna

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ख़ुद को समेटने में थी इतनी अगर-मगर बिखरा पड़ा हूँ आज भी तेरे इधर-उधर अपनी कमी से कह दो कि शिद्दत से तो रहे देखो कि रह न जाए कहीं कुछ कसर-वसर इक रोज़ तुम भी तो ज़रा ख़ुद से निकल मिलो तय कर लिए हैं मैं ने तो सारे सफ़र-वफ़र नफ़रत तिरी या प्यार हो ग़म हो शराब हो मुमकिन नहीं है थोड़े में अपनी गुज़र-बसर तू क्या गई मैं हो गया हूँ सख़्त-जान माँ लगती नहीं है अब तो मुझे कुछ नज़र-वज़र मुद्दत से कुछ भी तो तेरी चलती नहीं ख़ुदा रक्खा तू कर जहान की भी कुछ ख़बर-वबर बस इश्क़ का है मारा तो कुछ शे'र कह दिए वर्ना है ‘आश्ना’ में कहाँ कुछ हुनर-वुनर

Vineet Aashna

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अजब सी आज-कल मैं इक परेशानी में हूँ यारो यही मुश्किल मेरी है बस मैं आसानी में हूँ यारो मुझे उन झील सी आँखों में यूँँ भी डूबना ही है न पूछो बारहा कितने में अब पानी में हूँ यारो न सूरत वस्ल की कोई न कोई हिज्र का ग़म है मैं अब के बार कुछ ऐसी ही वीरानी में हूँ यारो मुझे लगता था मुमकिन ही नहीं है उस के बिन जीना मैं ज़िंदा हूँ मगर मुद्दत से हैरानी में हूँ यारो बदन का पैरहन छोटा मुझे पड़ने लगा इतना मैं खुल कर साँस लेने को भी उर्यानी में हूँ यारो ख़ुदा ने रख दिया मुझ को उसी के दिल में जाने क्यूँँ न बाहोँ में हूँ मैं जिस की न पेशानी में हूँ यारो उसी इक 'आशना' को ढूँढती हर पल मिरी आँखें मैं रहता रात-दिन जिस की निगहबानी में हूँ यारो

Vineet Aashna

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