तेरे प्यार में रुस्वा हो कर जाएँ कहाँ दीवाने लोग जाने क्या क्या पूछ रहे हैं ये जाने-पहचाने लोग हर लम्हा एहसास की सहबा रूह में ढलती जाती है ज़ीस्त का नश्शा कुछ कम हो तो हो आएँ मय-ख़ाने लोग जैसे तुम्हें हम ने चाहा है कौन भला यूँँ चाहेगा माना और बहुत आएँगे तुम से प्यार जताने लोग यूँँ गलियों बाज़ारों में आवारा फिरते रहते हैं जैसे इस दुनिया में सभी आए हों उम्र गँवाने लोग आगे पीछे दाएँ बाएँ साए से लहराते हैं दुनिया भी तो दश्त-ए-बला है हम ही नहीं दीवाने लोग कैसे दुखों के मौसम आए कैसी आग लगी यारो अब सहराओं से लाते हैं फूलों के नज़राने लोग कल मातम बे-क़ीमत होगा आज उन की तौक़ीर करो देखो ख़ून-ए-जिगर से क्या क्या लिखते हैं अफ़्साने लोग
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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को
Naseer Turabi
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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई नई है अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई नई है अभी न आएँगी नींद तुम को, अभी न हम को सुकूँ मिलेगा अभी तो धड़केगा दिल ज़ियादा, अभी मुहब्बत नई नई है बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएँ फ़ज़ा में ख़ुशबू नई नई है गुलों में रंगत नई नई है जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा के आके बैठे हो पहली सफ़ में अभी क्यूँ उड़ने लगे हवा में अभी तो शोहरत नई नई है बमों की बरसात हो रही है, पुराने जांबाज़ सो रहे हैं ग़ुलाम दुनिया को कर रहा है वो जिस की ताक़त नई नई है
Shabeena Adeeb
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कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला
Tehzeeb Hafi
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क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा
Javed Akhtar
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अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए मिले हैं यूँँ तो बहुत आओ अब मिलें यूँँ भी कि रूह गर्मी-ए-अनफ़ास से पिघल जाए मोहब्बतों में अजब है दिलों को धड़का सा कि जाने कौन कहाँ रास्ता बदल जाए ज़हे वो दिल जो तमन्ना-ए-ताज़ा-तर में रहे ख़ोशा वो उम्र जो ख़्वाबों ही में बहल जाए मैं वो चराग़ सर-ए-रहगुज़ार-ए-दुनिया हूँ जो अपनी ज़ात की तन्हाइयों में जल जाए हर एक लहजा यही आरज़ू यही हसरत जो आग दिल में है वो शे'र में भी ढल जाए
Obaidullah Aleem
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हिज्र करते या कोई वस्ल गुज़ारा करते हम बहर-हाल बसर ख़्वाब तुम्हारा करते एक ऐसी भी घड़ी इश्क़ में आई थी कि हम ख़ाक को हाथ लगाते तो सितारा करते अब तो मिल जाओ हमें तुम कि तुम्हारी ख़ातिर इतनी दूर आ गए दुनिया से किनारा करते मेहव-ए-आराइश-ए-रुख़ है वो क़यामत सर-ए-बाम आँख अगर आईना होती तो नज़ारा करते एक चेहरे में तो मुमकिन नहीं इतने चेहरे किस से करते जो कोई इश्क़ दोबारा करते जब है ये ख़ाना-ए-दिल आप की ख़ल्वत के लिए फिर कोई आए यहाँ कैसे गवारा करते कौन रखता है अँधेरे में दिया आँख में ख़्वाब तेरी जानिब ही तिरे लोग इशारा करते ज़र्फ़-ए-आईना कहाँ और तिरा हुस्न कहाँ हम तिरे चेहरे से आईना सँवारा करते
Obaidullah Aleem
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कोई धुन हो मैं तिरे गीत ही गाए जाऊँ दर्द सीने में उठे शोर मचाए जाऊँ ख़्वाब बन कर तू बरसता रहे शबनम शबनम और बस मैं इसी मौसम में नहाए जाऊँ तेरे ही रंग उतरते चले जाएँ मुझ में ख़ुद को लिक्खूँ तिरी तस्वीर बनाए जाऊँ जिस को मिलना नहीं फिर उस से मोहब्बत कैसी सोचता जाऊँ मगर दिल में बसाए जाऊँ अब तू उस की हुई जिस पे मुझे प्यार आता है ज़िंदगी आ तुझे सीने से लगाए जाऊँ यही चेहरे मिरे होने की गवाही देंगे हर नए हर्फ़ में जाँ अपनी समाए जाऊँ जान तो चीज़ है क्या रिश्ता-ए-जाँ से आगे कोई आवाज़ दिए जाए मैं आए जाऊँ शायद इस राह पे कुछ और भी राही आएँ धूप में चलता रहूँ साए बिछाए जाऊँ अहल-ए-दिल होंगे तो समझेंगे सुख़न को मेरे बज़्म में आ ही गया हूँ तो सुनाए जाऊँ
Obaidullah Aleem
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बना गुलाब तो काँटे चुभा गया इक शख़्स हुआ चराग़ तो घर ही जला गया इक शख़्स तमाम रंग मिरे और सारे ख़्वाब मिरे फ़साना थे कि फ़साना बना गया इक शख़्स मैं किस हवा में उड़ूँ किस फ़ज़ा में लहराऊँ दुखों के जाल हर इक सू बिछा गया इक शख़्स पलट सकूँ ही न आगे ही बढ़ सकूँ जिस पर मुझे ये कौन से रस्ते लगा गया इक शख़्स मोहब्बतें भी अजब उस की नफ़रतें भी कमाल मिरी ही तरह का मुझ में समा गया इक शख़्स मोहब्बतों ने किसी की भुला रखा था उसे मिले वो ज़ख़्म कि फिर याद आ गया इक शख़्स खुला ये राज़ कि आईना-ख़ाना है दुनिया और उस में मुझ को तमाशा बना गया इक शख़्स
Obaidullah Aleem
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पा-ब-ज़ंजीर सही ज़मज़मा-ख़्वाँ हैं हम लोग महफ़िल-ए-वक़्त तिरी रूह-ए-रवाँ हैं हम लोग दोश पर बार-ए-शब-ए-ग़म लिए गुल की मानिंद कौन समझे कि मोहब्बत की ज़बाँ हैं हम लोग ख़ूब पाया है सिला तेरी परस्तारी का देख ऐ सुब्ह-ए-तरब आज कहाँ हैं हम लोग इक मता-ए-दिल-ओ-जाँ पास थी सो हार चुके हाए ये वक़्त कि अब ख़ुद पे गराँ हैं हम लोग निकहत-ए-गुल की तरह नाज़ से चलने वालो हम भी कहते थे कि आसूदा-ए-जाँ हैं हम लोग कोई बतलाए कि कैसे ये ख़बर आम करें ढूँडती है जिसे दुनिया वो निशाँ हैं हम लोग क़िस्मत-ए-शब-ज़दगाँ जाग ही जाएगी 'अलीम' जरस-ए-क़ाफ़िला-ए-ख़ुश-ख़बराँ हैं हम लोग
Obaidullah Aleem
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