ترے سنگار کے بن میں تماشا میں نول دیکھا سرو کے جھاڑ کوں نرمل اناراں سے دو پھل دیکھا ترا قد نیشکر جانوں مکیاں جوبن چنپے کیاں دو ترے سینے کے جل میانے کچن کے دو کنول دیکھا سہاوے چولی نارنجی ہرے ڈالیاں منے تیرے چھے پاتاں میں جیوں نارنج یوں کچ پر انچل دیکھا ترے اس نخل خرماں کوں جوبن امرت دو پھل لاگے کچن کی گیند کوں نیلم جڑے سو میں اصل دیکھا ہوا ہے ہاشمیؔ مالی ترے سنگار کے بن میں لگے تجھ قد کی ڈالی پر کچن دو پھل نچھل دیکھا
Related Ghazal
तमाशा-ए-दैर-ओ-हरम देखते हैं तुझे हर बहाने से हम देखते हैं हमारी तरफ़ अब वो कम देखते हैं वो नज़रें नहीं जिन को हम देखते हैं ज़माने के क्या क्या सितम देखते हैं हमीं जानते हैं जो हम देखते हैं
Dagh Dehlvi
84 likes
मुझ पे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मिरे साथ न चल तू भी हो जाएगा बदनाम मिरे साथ न चल तू नई सुब्ह के सूरज की है उजली सी किरन मैं हूँ इक धूल भरी शाम मिरे साथ न चल अपनी ख़ुशियाँ मिरे आलाम से मंसूब न कर मुझ से मत माँग मिरा नाम मिरे साथ न चल तू भी खो जाएगी टपके हुए आँसू की तरह देख ऐ गर्दिश-ए-अय्याम मिरे साथ न चल मेरी दीवार को तू कितना सँभालेगा 'शकील' टूटता रहता हूँ हर गाम मिरे साथ न चल
Shakeel Azmi
26 likes
बहाना कर के वो बिछड़ा था मुझ से या दूजा वाक़ई अच्छा था मुझ से उसे जब जब ज़माना तंग करता वो उस को छोड़ कर लड़ता था मुझ से महीनों फूल भिजवाने पड़े थे वो पहली बार जब रूठा था मुझ से भरोसा फिर किसी पर हो न पाया तुम्हारा आख़िरी रिश्ता था मुझ से बड़ी मुद्दत में फिर से हाथ आया बड़ी उजलत में जो छूटा था मुझ से बुलंदी पर पहुच कर भूल बैठा जो अक्सर सीढियाँ लेता था मुझ से अब उस के बिन भी हँस कर कट रही है कभी इक पल नहीं कटता था मुझ से
Varun Anand
24 likes
डर है घर में कैसे बोला जाएगा छोड़ो जो भी होगा देखा जाएगा नंबर लिखकर हाथों में पकड़ा देना तेरे घर इक छोटा बच्चा जाएगा मैं बस उस का चेहरा पढ़ कर जाऊँगा मेरा पेपर सब सेे अच्छा जाएगा
Vishal Singh Tabish
33 likes
कल शब लिबास उस ने जो पहना गुलाब का ख़ुशबू गुलाब की कहीं चर्चा गुलाब का देखी हसीन लोगों की औलाद भी हसीन पौधे से उगता देखा है पौधा गुलाब का मैं था गुलाब तोड़ने वालों के शहर से और उस को चाहिए था बगीचा गुलाब का सुनते हो आज टूट गया लाडले का दिल अब उस के आगे ज़िक्र न करना गुलाब का
Kushal Dauneria
30 likes
Similar Writers
Our suggestions based on ہاشمی بیجاپوری.
Similar Moods
More moods that pair well with ہاشمی بیجاپوری's ghazal.







