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ترے سنگار کے بن میں تماشا میں نول دیکھا سرو کے جھاڑ کوں نرمل اناراں سے دو پھل دیکھا ترا قد نیشکر جانوں مکیاں جوبن چنپے کیاں دو ترے سینے کے جل میانے کچن کے دو کنول دیکھا سہاوے چولی نارنجی ہرے ڈالیاں منے تیرے چھے پاتاں میں جیوں نارنج یوں کچ پر انچل دیکھا ترے اس نخل خرماں کوں جوبن امرت دو پھل لاگے کچن کی گیند کوں نیلم جڑے سو میں اصل دیکھا ہوا ہے ہاشمیؔ مالی ترے سنگار کے بن میں لگے تجھ قد کی ڈالی پر کچن دو پھل نچھل دیکھا

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तमाशा-ए-दैर-ओ-हरम देखते हैं तुझे हर बहाने से हम देखते हैं हमारी तरफ़ अब वो कम देखते हैं वो नज़रें नहीं जिन को हम देखते हैं ज़माने के क्या क्या सितम देखते हैं हमीं जानते हैं जो हम देखते हैं

Dagh Dehlvi

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मुझ पे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मिरे साथ न चल तू भी हो जाएगा बदनाम मिरे साथ न चल तू नई सुब्ह के सूरज की है उजली सी किरन मैं हूँ इक धूल भरी शाम मिरे साथ न चल अपनी ख़ुशियाँ मिरे आलाम से मंसूब न कर मुझ से मत माँग मिरा नाम मिरे साथ न चल तू भी खो जाएगी टपके हुए आँसू की तरह देख ऐ गर्दिश-ए-अय्याम मिरे साथ न चल मेरी दीवार को तू कितना सँभालेगा 'शकील' टूटता रहता हूँ हर गाम मिरे साथ न चल

Shakeel Azmi

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बहाना कर के वो बिछड़ा था मुझ से या दूजा वाक़ई अच्छा था मुझ से उसे जब जब ज़माना तंग करता वो उस को छोड़ कर लड़ता था मुझ से महीनों फूल भिजवाने पड़े थे वो पहली बार जब रूठा था मुझ से भरोसा फिर किसी पर हो न पाया तुम्हारा आख़िरी रिश्ता था मुझ से बड़ी मुद्दत में फिर से हाथ आया बड़ी उजलत में जो छूटा था मुझ से बुलंदी पर पहुच कर भूल बैठा जो अक्सर सीढियाँ लेता था मुझ से अब उस के बिन भी हँस कर कट रही है कभी इक पल नहीं कटता था मुझ से

Varun Anand

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डर है घर में कैसे बोला जाएगा छोड़ो जो भी होगा देखा जाएगा नंबर लिखकर हाथों में पकड़ा देना तेरे घर इक छोटा बच्चा जाएगा मैं बस उस का चेहरा पढ़ कर जाऊँगा मेरा पेपर सब सेे अच्छा जाएगा

Vishal Singh Tabish

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कल शब लिबास उस ने जो पहना गुलाब का ख़ुशबू गुलाब की कहीं चर्चा गुलाब का देखी हसीन लोगों की औलाद भी हसीन पौधे से उगता देखा है पौधा गुलाब का मैं था गुलाब तोड़ने वालों के शहर से और उस को चाहिए था बगीचा गुलाब का सुनते हो आज टूट गया लाडले का दिल अब उस के आगे ज़िक्र न करना गुलाब का

Kushal Dauneria

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