ghazalKuch Alfaaz

ये माना उस तरफ़ रस्ता न जाए मगर फिर भी मुझे रोका न जाए बदल सकती है रुख़ तस्वीर अपना कुछ इतने ग़ौर से देखा न जाए उलझने के लिए सौ उलझनें हैं बस अपने आप से उलझा न जाए इरादा वापसी का हो अगर तो बहुत गहराई में उतरा न जाए हमारी अर्ज़ बस इतनी है 'दानिश' उदासी का सबब पूछा न जाए

Related Ghazal

कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला

Tehzeeb Hafi

435 likes

तमाशा-ए-दैर-ओ-हरम देखते हैं तुझे हर बहाने से हम देखते हैं हमारी तरफ़ अब वो कम देखते हैं वो नज़रें नहीं जिन को हम देखते हैं ज़माने के क्या क्या सितम देखते हैं हमीं जानते हैं जो हम देखते हैं

Dagh Dehlvi

84 likes

तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ

Fahmi Badayuni

249 likes

जो तेरे साथ रहते हुए सोगवार हो लानत हो ऐसे शख़्स पे और बेशुमार हो अब इतनी देर भी ना लगा, ये हो ना कहीं तू आ चुका हो और तेरा इंतिज़ार हो मैं फूल हूँ तो फिर तेरे बालो में क्यूँ नहीं हूँ तू तीर है तो मेरे कलेजे के पार हो एक आस्तीन चढ़ाने की आदत को छोड़ कर ‘हाफ़ी’ तुम आदमी तो बहुत शानदार हो

Tehzeeb Hafi

268 likes

बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं अहद-ए-वफ़ा से किस लिए ख़ाइफ़ हो मेरी जान कर लो कि तुम ने अहद निभाना तो है नहीं वो जो हमें अज़ीज़ है कैसा है कौन है क्यूँँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं दुनिया हम अहल-ए-इश्क़ पे क्यूँँ फेंकती है जाल हम ने तिरे फ़रेब में आना तो है नहीं वो इश्क़ तो करेगा मगर देख भाल के 'फ़ारिस' वो तेरे जैसा दिवाना तो है नहीं

Rehman Faris

196 likes

More from Madan Mohan Danish

कोई काँटा न हो  गुलाबों में  ऐसा मुमकिन है सिर्फ़ ख़्वाबों में  दिल को कैसे क़रार आता है  ये लिखा ही नहीं किताबों में  इतने सीधे सवाल थे मेरे  वो उलझता गया जवाबों में  मैं ही उस का ग़ुरूर था दानिश  और मुझी को रखा  ख़राबों में

Madan Mohan Danish

13 likes

रंग-ए-दुनिया कितना गहरा हो गया आदमी का रंग फीका हो गया रात क्या होती है हम से पूछिए आप तो सोए सवेरा हो गया डूबने की ज़िद पे कश्ती आ गई बस यहीं मजबूर दरिया हो गया आज ख़ुद को बेचने निकले थे हम आज ही बाज़ार मंदा हो गया ग़म अँधेरे का नहीं 'दानिश' मगर वक़्त से पहले अँधेरा हो गया

Madan Mohan Danish

4 likes

कोई ये लाख कहे मेरे बनाने से मिला हर नया रंग ज़माने को पुराने से मिला फ़िक्र हर बार ख़मोशी से मिली है मुझ को और ज़माना ये मुझे शोर मचाने से मिला उस की तक़दीर अँधेरों ने लिखी थी शायद वो उजाला जो चराग़ों को बुझाने से मिला पूछते क्या हो मिला कैसे ये जंगल को तिलिस्म छाँव में धूप की रंगत को मिलाने से मिला और लोगों से मुलाक़ात कहाँ मुमकिन थी वो तो ख़ुद से भी मिला है तो बहाने से मिला मेरी तश्कील तो कुछ और हुई थी 'दानिश' ये नया नक़्श मुझे ख़ुद को मिटाने से मिला

Madan Mohan Danish

5 likes

हम अपने दुख को गाने लग गए हैं मगर इस में ज़माने लग गए हैं किसी की तर्बियत का है करिश्मा ये आँसू मुस्कुराने लग गए हैं कहानी रुख़ बदलना चाहती है नए किरदार आने लग गए हैं ये हासिल है मिरी ख़ामोशियों का कि पत्थर आज़माने लग गए हैं ये मुमकिन है किसी दिन तुम भी आओ परिंदे आने जाने लग गए हैं जिन्हें हम मंज़िलों तक ले के आए वही रस्ता बताने लग गए हैं शराफ़त रंग दिखलाती है 'दानिश' कई दुश्मन ठिकाने लग गए हैं

Madan Mohan Danish

27 likes

पत्थर पहले ख़ुद को पत्थर करता है उस के बा'द ही कुछ कारीगर करता है एक ज़रा सी कश्ती ने ललकारा है अब देखें क्या ढोंग समुंदर करता है कान लगा कर मौसम की बातें सुनिए क़ुदरत का सब हाल उजागर करता है उस की बातों में रस कैसे पैदा हो बात बहुत ही सोच-समझकर करता है जिस को देखो 'दानिश' का दीवाना है क्या वो कोई जादू-मंतर करता है

Madan Mohan Danish

27 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Madan Mohan Danish.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Madan Mohan Danish's ghazal.