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zara si raat dhal jaae to shayad niind aa jaae zara sa dil bahal jaae to shayad niind aa jaae abhi to karb hai be-chainiyan hain be-qarari hai tabiat kuchh sambhal jaae to shayad niind aa jaae hava ke narm jhonkon ne jagaya teri yadon ko hava ka rukh badal jaae to shayad niind aa jaae ye tufan ansuon ka jo umad aaya hai palkon tak kisi surat ye tal jaae to shayad niind aa jaae ye hansta muskurata qafila jo chand taron ka 'farah' aage nikal jaae to shayad niind aa jaae zara si raat dhal jae to shayad nind aa jae zara sa dil bahal jae to shayad nind aa jae abhi to karb hai be-chainiyan hain be-qarari hai tabiat kuchh sambhal jae to shayad nind aa jae hawa ke narm jhonkon ne jagaya teri yaadon ko hawa ka rukh badal jae to shayad nind aa jae ye tufan aansuon ka jo umad aaya hai palkon tak kisi surat ye tal jae to shayad nind aa jae ye hansta muskuraata qafila jo chand taron ka 'farah' aage nikal jae to shayad nind aa jae

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अब मेरे साथ नहीं है समझे ना समझाने की बात नहीं है समझे ना तुम माँगोगे और तुम्हें मिल जाएगा प्यार है ये ख़ैरात नहीं है समझे ना मैं बादल हूँ जिस पर चाहूँ बरसूँगा मेरी कोई ज़ात नहीं है समझे ना अपना ख़ाली हाथ मुझे मत दिखलाओ इस में मेरा हाथ नहीं है समझे ना

Zubair Ali Tabish

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शोर करूँँगा और न कुछ भी बोलूँगा ख़ामोशी से अपना रोना रो लूँगा सारी उम्र इसी ख़्वाहिश में गुज़री है दस्तक होगी और दरवाज़ा खोलूँगा तन्हाई में ख़ुद से बातें करनी हैं मेरे मुँह में जो आएगा बोलूँगा रात बहुत है तुम चाहो तो सो जाओ मेरा क्या है मैं दिन में भी सो लूँगा तुम को दिल की बात बतानी है लेकिन आँखें बंद करो तो मुट्ठी खोलूँगा

Tehzeeb Hafi

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शाम ढले मैं घर रौशन भी करता था कितना कुछ तो मैं बेमन भी करता था दुनिया मुझ सेे सिर्फ़ मोहब्बत करती है वो दीवाना पागलपन भी करता था तुम जो कहते थे ना इक दिन छू लोगे छू लेते ना मेरा मन भी करता था मेरे सिरहाने वो घुँघरू गुम-सुम है उस के पैरों में छनछन भी करता था उस के हाथों में बस हम ही जँचते थे दावा सोने का कंगन भी करता था

Vishal Bagh

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अब नए सपने सजाना आप को शादी मुबारक रात दिन बस मुस्कुराना आप को शादी मुबारक याद करवाई थी मैं ने जो ग़ज़ल मेरी कभी वो हो सके तो भूल जाना आप को शादी मुबारक जानता हूँ मन करेगा बात करलें इक दफ़ा बस फ़ोन लेकिन मत लगाना आप को शादी मुबारक दूर अब माँ बाप से घर से हमेशा ही रहोगे वक़्त पर खा लेना खाना आप को शादी मुबारक आपसे ये इल्तिजा, मैं जब कभी टीवी पे आऊँ आप चैनल मत हटाना, आप को शादी मुबारक पूछ ले कोई सहेली क्या हुआ उस इश्क़ का तो दोष मुझ पर ही लगाना आप को शादी मुबारक आपने शादी रचाई तो मेरी उम्मीद टूटी शुक्रिया करता दीवाना आप को शादी मुबारक

Tanoj Dadhich

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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे शाम हुए ख़ुश-बाश यहाँ के मेरे पास आ जाते हैं मेरे बुझने का नज़्ज़ारा करने आ जाते होंगे वो जो न आने वाला है ना उस से मुझ को मतलब था आने वालों से क्या मतलब आते हैं आते होंगे उस की याद की बाद-ए-सबा में और तो क्या होता होगा यूँँही मेरे बाल हैं बिखरे और बिखर जाते होंगे यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे मेरा साँस उखड़ते ही सब बैन करेंगे रोएँगे या'नी मेरे बा'द भी या'नी साँस लिए जाते होंगे

Jaun Elia

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सारे मंज़र दिलकश थे हर बात सुहानी लगती थी जीवन की हर शाम हमें तब एक कहानी लगती थी जिस का चाँद सा चेहरा था और ज़ुल्फ़ सुनहरी बादल सी मस्त हवा का आँचल था में एक दिवानी लगती थी अपने ख़्वाब नए लगते थे और फिर उन के आगे सब दुनिया और ज़माने की हर बात पुरानी लगती थी प्यार के मौसम की ख़ुशबू से ग़ुंचा ग़ुंचा महका था महकी महकी दुनिया सारी रात की रानी लगती थी लम्हों के रंगीन ग़ुबारे हाथ से छूटे जाते थे मौसम दुख का दर्द की रुत सब आनी-जानी लगती थी क़ौस-ए-क़ुज़ह की बारिश में ये जज़्बों की मुँह ज़ोर हवा मौज उड़ाते बल खाते दरिया की रवानी लगती थी अब देखें तो दूर कहीं पर यादों की फुलवारी में रंगों से भरपूर फ़ज़ा थी जो ला-फ़ानी लगती थी

Farah Iqbal

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