nazmKuch Alfaaz

"तुम्हारा ख़याल" भोर में सूरज की हल्की रौशनी से जब नदी का जल चमक जाता है तुम्हारा अक्स मुझे नज़र आता है निशा में; महताब की चाँदनी तले टिमटिमाते तारों को देखता हूँ तुम्हारा चेहरा निखर आता है हल्की बारिश के बा'द मिट्टी से आने वाली गंध सी हो तुम किसी पवित्र ग्रंथ सी हो तुम लापता हूँ मैं ख़ुद ही में मुझ में बसी हो तुम रूह की रूहानियत हो आँखों की नमी हो तुम तुम्हारी आवाज़ कोयल की मीठी बोली सी लगती हँ तुम हो तो मैं हूँ तुम्हीं से मेरी साँसे चलती हैं पंछियों की चहचहाहट से तुम्हारा मुस्कुराना याद आता है जब भी इबादत करे 'प्रीत' तुम्हारा ज़िक्र हो ही जाता है

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मेरा संसार मेरे मन का सुकून भी तुम हो, तुम ही मेरी मंज़िल उस का जुनून भी तुम हो, मेरा दिन भी तुम हो, मेरी रात भी तुम हो, मेरी नींद भी तुम हो, मेरे जज़्बात भी तुम हो, मेरा हर लम्हा तुम हो, मेरे हालात भी तुम हो, मेरा जीवन भी तुम हो, इस की मस्ती भी तुम हो, हूँ अगर मैं मँझधार तो, फिर इस की कश्ती भी तुम हो, अगर हूँ मैं शरीर तो, इस की अस्थि भी तुम हो, और हूँ अगर मैं आत्मा तो, इस की मुक्ति भी तुम हो, मेरा वैराग्य भी तुम हो, मेरी आसक्ति भी तुम हो, मेरा ईश्वर भी तुम हो, मेरी भक्ति भी तुम हो, मैं अगर दिल हूँ तो, इस की धड़कन भी तुम हो, मेरी हर बात तुम हो, मेरी तड़पन भी तुम हो, मेरी स्वतंत्रता भी तुम हो, मेरा बंधन भी तुम हो, मेरा सुख भी तुम हो, मेरी मुस्कान भी तुम हो, मेरा दुख भी तुम हो, मेरा सम्मान भी तुम हो, मेरा बल भी तुम हो, मेरा स्वाभिमान भी तुम हो, मेरी प्रार्थना भी तुम हो, मेरा अभिमान भी तुम हो, मेरा हर काम भी तुम हो, थक जाऊँ तो आराम भी तुम हो, भेजे हैं तुझ को चाँद के हाथों, वो सारे पैग़ाम भी तुम हो, साँसों में बस तेरा नाम है, मेरा तो अंजाम भी तुम हो, मेरा तो आधार ही तुम हो, मेरी तो सरकार ही तुम हो, मेरी तो फ़कीरी भी तुम हो, ख़ज़ाने का अंबार भी तुम हो, मेरे लबों का मौन भी तुम हो, मेरे दिल की पुकार भी तुम हो, मेरी तो कुटिया भी तुम हो, मेरा राज-दरबार भी तुम हो, मेरा हर विकार भी तुम हो, मेरा तो श्रृंगार भी तुम हो, मेरी जीत-हार भी तुम हो, मेरा गुस्सा-प्यार भी तुम हो, मेरा तो घर बार ही तुम हो, जीने के आसार ही तुम हो, कैसे मैं बताऊ तुझे, तुम्हारे बिन मैं कुछ भी नहीं, मेरा तो संसार ही तुम हो, मेरा तो संसार ही तुम हो, मेरा तो संसार ही तुम हो।

Divya 'Kumar Sahab'

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तुम हमारे लिए तुम हमारे लिए अर्चना बन गई हम तुम्हारे लिए एक दर्पण प्रिये तुम मिलो तो सही हाल पूछो मेरा हम न रो दें तो कह देना पत्थर प्रिये प्यार मिलना नहीं था अगर भाग्य में देवताओं ने हम सेे ये छल क्यूँ किया मेरे दिल में भरी रेत ही रेत थी दे के अमृत ये हम को विकल क्यूँ किया अप्सरा हो तो हो पर हमारे लिए तुम ही सुंदर सुकोमल सुघर हो प्रिये देवताओं के गणितीय संसार में ऐसा भी है नहीं कोई अच्छा न था हम अगर इस जनम भी नहीं मिल सके सब कहेंगे यही प्यार सच्चा न था कायरों को कभी प्यार मिलता नहीं फ़ैसला कोई ले लो कि डटकर प्रिये मम्मी कहती थीं चंदा बहुत दूर है चाँद से आगे हम को सितारा लगा यूँँ तो चेहरे ही चेहरे थे दुनिया में पर एक तेरा ही चेहरा पियारा लगा पलकों पे मेरी रख कर क़दम तुम चलो पॉंव में चुभ न जाए कि कंकड़ प्रिये

Rakesh Mahadiuree

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तुम्हें इक बात कहनी थी इजाज़त हो तो कह दूँ मैं ये भीगा भीगा सा मौसम ये तितली फूल और शबनम चमकते चाँद की बातें ये बूँदें और बरसातें ये काली रात का आँचल हवा में नाचते बादल धड़कते मौसमों का दिल महकती ख़ुश्बूओं का दिल ये सब जितने नज़ारे हैं कहो किस के इशारे हैं सभी बातें सुनी तुम ने फिर आँखें फेर लीं तुम ने मैं तब जा कर कहीं समझा कि तुम ने कुछ नहीं समझा मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के ज़रा नीची नज़र कर के ये कहता हूँ अभी तुम से मोहब्बत हो गई तुम से

Zubair Ali Tabish

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"दोस्त के नाम ख़त" तुम ने हाल पूछा है हालत-ए-मोहब्बत में हाल का बताना क्या! दिल सिसक रहा हो तो ज़ख़्म का छुपाना क्या! तुम जो पूछ बैठे हो कुछ तो अब बताना है बात एक बहाना है तुम ने हाल पूछा है इक दिया जलाता हूँ ठीक है बताता हूँ रोज़ उस की यादों में दूर तक चले जाना जो भी था कहा उस ने अपने साथ दोहराना साँस जब रुके तो फिर अपनी मरती आँखों में उस की शक्ल ले आना और ज़िन्दगी पाना रोज़ ऐसे होता है कुछ पुराने मैसेज हैं जिन में उस की बातें हैं कुछ तबील सुब्हे हैं कुछ क़दीम रातें हैं मैं ने उस की बातों में ज़िन्दगी गुज़ारी है ज़िन्दगी मिटाने का हौसला नहीं मुझ में एक एक लफ़्ज़ उस का साँस में पिरोया है, रूह में समोया है उस के जितने मैसेज है रोज़ खोल लेता हूँ उस सेे कह नहीं पाता ख़ुद से बोल लेता हूँ उस के पेज पर जा कर रोज़ देखता हूँ मैं आज कितने लोगों ने उस की पैरवी की है और सोचता हूँ मैं ये नसीब वाले हैं उस को देख सकते हैं उस सेे बात करते हैं ये इजाज़तों वाले मुझ सेे कितने बेहतर हैं मैं तो दाग़ था कोई जो मिटा दिया उस ने गर मिटा दिया उस ने ठीक ही किया उस ने, तुम ने हाल पूछा था लो बता दिया मैं ने जो भी कुछ बताया है उस को मत बता देना पढ़ के रो पड़ो तो फिर इन तमाम लफ़्ज़ों को बस गले लगा लेना, वो मेरी मोहब्बत है और सदा रहेगी वो जब नहीं रहूँगा तो एक दिन कहेगी वो तुम अली फ़क़त तुम थे जिस ने मुझ को चाहा था जिस ने मेरे माथे को चूम कर बताया था तुम दुआ का चेहरा हो तुम हया का पहरा हो मैं तो तब नहीं हूँगा पर मेरी सभी नज़्में उस की बात सुन लेंगी तुम भी मुस्कुरा देना फिर बहुत मोहब्बत से उस को सब बता देना उस के नर्म हाथों में मेरा ख़त थमा देना लो ये ख़त तुम्हारा है और उस की जानिब से वो जो बस तुम्हारा था आज भी तुम्हारा है

Ali Zaryoun

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तुम्हारा फ़ोन आया है अजब सी ऊब शामिल हो गई है रोज़ जीने में पलों को दिन में, दिन को काट कर जीना महीने में महज़ मायूसियाँ जगती हैं अब कैसी भी आहट पर हज़ारों उलझनों के घोंसले लटके हैं चौखट पर अचानक सब की सब ये चुप्पियाँ इक साथ पिघली हैं उम्मीदें सब सिमट कर हाथ बन जाने को मचली हैं मेरे कमरे के सन्नाटे ने अँगड़ाई सी तोड़ी है मेरी ख़ामोशियों ने एक नग़्मा गुनगुनाया है तुम्हारा फ़ोन आया है, तुम्हारा फ़ोन आया है सती का चैतरा दिख जाए जैसे रूप-बाड़ी में कि जैसे छठ के मौक़े' पर जगह मिल जाए गाड़ी में मेरी आवाज़ से जागे तुम्हारे बाम-ओ-दर जैसे ये नामुमकिन सी हसरत है, ख़याली है, मगर जैसे बड़ी नाकामियों के बा'द हिम्मत की लहर जैसे बड़ी बेचैनियों के बा'द राहत का पहर जैसे बड़ी गुमनामियों के बा'द शोहरत की मेहर जैसे सुब्ह और शाम को साधे हुए इक दोपहर जैसे बड़े उनवान को बाँधे हुए छोटी बहर जैसे नई दुल्हन के शरमाते हुए शाम-ओ-सहर जैसे हथेली पर रची मेहँदी अचानक मुस्कुराई है मेरी आँखों में आँसू का सितारा जगमगाया है तुम्हारा फ़ोन आया है, तुम्हारा फ़ोन आया है

Kumar Vishwas

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"गुमशुदा" इन पहाड़ों के पीछे दूर घने जंगलों में इस दरिया के उस पार काली अँधेरी गुफ़ाओं में एक परी रहती थी जो अब वहाँ नहीं है अब वो मेरे दिल में है और मेरा दिल अब भी वहीं है जहाँ वो परी रहती थी न दिल की ख़बर अब न परी का पता है दोनों ही गुमशुदा हैं

Prit

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"मैं मोहब्बत हूँ" मेरे बा'द दुनिया का क्या होगा कि मैं तो मोहब्बत हूँ मैं शबरी के जूठे लबों से राम के पेट तक जाता बैर हूँ जिस के लिए कृष्ण ने शाही भोजन ठुकराया मैं विदुर का कुबेर हूँ मैं हर बार आता हूँ पर जहाँ मुझे पहचान नहीं पाता अगर पहचान भी ले प्रीत तो ठीक से जान नहीं पाता कहीं रोमियो-जूलियट के मरकज़ की दीवार हूँ जिसे खोदता हुआ फ़रहाद मर गया नहर का वो पार हूँ जिस के किनारों पर सागर-ए-सहरा है जिस में कोई क़ैस मजनू हो कर गाम-ब-गाम भटक रहा है लैला की कलाई हूँ मैं ख़य्याम की रूबाई हूँ मैं नज़्म-ए-फ़ैज़ हूँ मैं सब सेे तेज़ हूँ मैं सय्याद हूँ चाक-ए-क़फ़स हूँ जिस्म-ओ-दिल के दरमियाँ हूँ इश्क़ हूँ हवस हूँ बे-वफ़ाई का ख़ुदा हूँ वफ़ादारों का पीर हूँ सब मुझ सेे रहाइश-पज़ीर हैं और मैं सबका असीर हूँ मुझ से सब की ये हालत है मैं हालात से पशेमाँ हूँ मैं दस्त-ए-ज़ुलेखा भी हूँ मैं ही चाक-गरेबाँ हूँ मैं मीर-ओ-ग़ालिब की ग़ज़ल हूँ कीचड़ हूँ कमल हूँ जो मेरे अंदर उतरे कभी बाहर न आने पाए कि मैं तो दलदल हूँ मैं हीर-राँझा के मरकज़ हिज्र हूँ महबूब की गाली हूँ माँ की फ़िक्र हूँ मैं वो लफ़्ज़ जिसे सुन कर शाह भरी महफ़िल औरत का पैरहन उतरता है मैं वो दुआ जिसे पढ़ने पर कोई कृष्ण आ के उसे बचाता है मैं वो अल्फ़ाज़ जिसे गा कर जवान सरहद पार से प्रेमिका को पुकारता है मैं वो कंगन जो विधवा के लिए विरह के गीत गाता है मैं श्रृंगार मैं ही विरह गीत हूँ दुनिया शाइ'र जाने मुझ को लेकिन मैं तो प्रीत हूँ मेरी दुनिया को चाहत है कि मैं रस्म-ए-अदावत हूँ आज़ाद की गोली हूँ भगत सिंह की बग़ावत हूँ मेरे बा'द दुनिया का क्या होगा कि मैं तो मोहब्बत हूँ

Prit

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"ख़्वाब" सौ सदियों में सिर्फ़ इक दफ़ा जब तुम मुझ सेे मिलने आई थी अचानक से गुल खिलने लगे थे सहरा में बारिश छाई थी उस दिन आफ़ताब शब में रौशन हुआ था क़मर आग की लपटों में जल रहा था जैसे हमारा इश्क़ जल रहा था जिस ने पिघला दिया था सारे हिमालय को और सारे समंदरों को ख़ुश्क कर दिया था ये प्रलय का दिन था ये हक़ीक़त का दिन था उस दिन पहली मर्तबा सब जागे हुए थे पहली बार था कि सब अपने ख़्वाब से बाहर आए थे या रब ये ख़्वाब कितना हसीन था

Prit

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"याद मेरी आएगी" जब दुनिया अपना रंग दिखाएगी जब तुम्हें वफ़ा समझ आएगी जब सब छोड़ कर जा रहे होंगे जब तुम्हारी आँखें भर आएँगी तुम्हें याद आएगी मेरी जब सब कुछ तबाह हो जाएगा साँसें थमने को होंगी तुम्हारी तुम्हें याद आएगी मेरी अन्तिम क्षणों में सिसकियाँ भर रही होगी मन ही मन रो रही होगी किसी से जब कुछ न कह पाओगी अपना दर्द न जाता पाओगी जब कोई न होगा हमदर्द तुम्हारा जब न होगी किसे परवाह तुम्हारी तुम्हें याद आएगी मेरी याद मेरी क़यामत है इक न इक दिन तो आएगी ही जो आज इतना हँस रहे हो ना देखना इक दिन रुलाएगी ही हमें रुला कर तुम हँसते हो अरे जनाब मूर्ख बनते हो देखना ये क़ुदरत इक दिन तुम्हें सताएगी, तड़पाएगी ये दुनिया जब अपना नकाब हटाएगी तुम्हें याद मेरी आएगी

Prit

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"तन्हाई है, तन्हाई है, तन्हाई है!" गुल है, गुलाब हैं, हर तरफ़ बहार है ख़िज़ाँ में भी रंगत आई है ना जाने फिर भी क्यो मायूसी छाई है तन्हाई है, तन्हाई है, तन्हाई है उन की याद आना जैसे साँस लेना है ये बात जानलेवा है उन की तस्वीर कुछ ऐसी बसी है हम ने उन्हें बंद आँखों से पहचान लेना है यादों ने उन की हमारी बेक़रारी और बढ़ाई है तन्हाई है, तन्हाई है, तन्हाई है यादों में उन की हम रोए जा रहे हैं बेवजह पलकें भिगोए जा रहे हैं जो कभी हमारे थे ही नहीं हम उन के हुए जा रहे हैं क्या करें, अपनी मौत हमनें ख़ुद बुलाई है तन्हाई है, तन्हाई है, तन्हाई है

Prit

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