एजाज़-ए-उल्फ़त दिल अब बहला न सकेगा परचम ये इश्क़ का फिर से लहरा न सकेगा
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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ज़िंदगी भर के लिए दिल पे निशानी पड़ जाए बात ऐसी न लिखो, लिख के मिटानी पड़ जाए
Aadil Rasheed
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आज तो दिल के दर्द पर हँस कर दर्द का दिल दुखा दिया मैं ने
Zubair Ali Tabish
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तड़प के रोए हैं चेहरा अगर छुपाया है कि लोग देख न ले आँख में समुंदर को
arjun chamoli
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मेरे बयान का मतलब बदल दिया उस ने सवाल करता था जो मेरा रहनुमा बनकर
arjun chamoli
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निकम्मेपन का तम्ग़ा पा लिया मैं ने वफ़ा करना निभाना था बड़ा मुश्किल
arjun chamoli
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उसे तो मौत की लज़्ज़त को ख़ुद महसूस करना था दिया जाम-ए-शहादत है मुझे बाँहों में भर कर यूँँ
arjun chamoli
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दिल मेरा था रो रहा आँखें थी उस की रो रहीं वो बने बिस्मिल थे आब-ए-गिर्या जो थे देखते
arjun chamoli
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