अमीर-ए-शहर का रिश्ते में कोई कुछ नहीं लगता ग़रीबी चाँद को भी अपना मामा मान लेती है
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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न जाने कैसी महक आ रही है बस्ती से वही जो दूध उबलने के बा'द आती है
Munawwar Rana
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इंसानों को जलवाएगी कल इस से ये दुनिया जो बच्चा खिलौना भी ज़मीं पर नहीं रखता
Munawwar Rana
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ख़ामुशी कब चीख़ बन जाए किसे मालूम है ज़ुल्म कर लो जब तलक ये बे-ज़बानी और है
Munawwar Rana
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इतनी तवक़्क़ुआत ज़माने को हम सेे है उतनी तो उम्र भी नहीं लाए लिखा के हम
Munawwar Rana
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मोहब्बत एक पाकीज़ा अमल है इस लिए शायद सिमट कर शर्म सारी एक बोसे में चली आई
Munawwar Rana
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