अंतर है ये रिश्ता रखने और निभाने में हर कोई नहीं जल सकता दीप जलाने में
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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रिवीज़न सौ दफ़ा कर के था मैं आया क़िताबों के मैं पर्चे भी बना लाया मैं बैठा इश्क़ के इस इम्तिहाँ में जब तो पेपर ही सिलेबस से परे आया
Pritam sihag
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संसार को बेहद ज़ालिम जान लिया मैं ने फिर उस सेे मिला हाथों को चूम दिया मैं ने जो उस ने किताब-ए-ग़म तोहफ़े में मुझे दी थी इक पन्ना ये याद-ए-रफ़्ता चूम लिया मैं ने
Pritam sihag
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ये तुम रोज़ किस दरिया में बह रहे हो ये दिल ख़ाली है, तुम कहाँ रह रहे हो ये मैं हूँ कि ग़म में लिखे जा रहा हूँ वो कहते हैं अच्छी ग़ज़ल कह रहे हो
Pritam sihag
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यूँँ ही नहीं लगाया सिगरेट को लबों से मैं उस की सारी यादें सुलगाना चाहता हूँ
Pritam sihag
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यूँँ तो लिख लूँगा अपने आप ही मेरी कहानी मैं हो इन में नाम गर अपनों के भी शामिल तो क्या होता
Pritam sihag
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