ये तुम रोज़ किस दरिया में बह रहे हो ये दिल ख़ाली है, तुम कहाँ रह रहे हो ये मैं हूँ कि ग़म में लिखे जा रहा हूँ वो कहते हैं अच्छी ग़ज़ल कह रहे हो
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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अनजान सफ़र में मैं तन्हा नहीं हूँ यारों घर के सभी ज़िम्मों को जो साथ लिया मैं ने
Pritam sihag
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संसार को बेहद ज़ालिम जान लिया मैं ने फिर उस सेे मिला हाथों को चूम दिया मैं ने जो उस ने किताब-ए-ग़म तोहफ़े में मुझे दी थी इक पन्ना ये याद-ए-रफ़्ता चूम लिया मैं ने
Pritam sihag
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उस ने इक दिन छोड़ने की बात कह दी या'नी मेरे दिल की बातें जानती थी
Pritam sihag
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यूँँ तो लिख लूँगा अपने आप ही मेरी कहानी मैं हो इन में नाम गर अपनों के भी शामिल तो क्या होता
Pritam sihag
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रिवीज़न सौ दफ़ा कर के था मैं आया क़िताबों के मैं पर्चे भी बना लाया मैं बैठा इश्क़ के इस इम्तिहाँ में जब तो पेपर ही सिलेबस से परे आया
Pritam sihag
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