sherKuch Alfaaz

अनजान सफ़र में मैं तन्हा नहीं हूँ यारों घर के सभी ज़िम्मों को जो साथ लिया मैं ने

More from Pritam sihag

संसार को बेहद ज़ालिम जान लिया मैं ने फिर उस सेे मिला हाथों को चूम दिया मैं ने जो उस ने किताब-ए-ग़म तोहफ़े में मुझे दी थी इक पन्ना ये याद-ए-रफ़्ता चूम लिया मैं ने

Pritam sihag

2 likes

रिवीज़न सौ दफ़ा कर के था मैं आया क़िताबों के मैं पर्चे भी बना लाया मैं बैठा इश्क़ के इस इम्तिहाँ में जब तो पेपर ही सिलेबस से परे आया

Pritam sihag

2 likes

यूँँ तो लिख लूँगा अपने आप ही मेरी कहानी मैं हो इन में नाम गर अपनों के भी शामिल तो क्या होता

Pritam sihag

5 likes

यूँँ ही नहीं लगाया सिगरेट को लबों से मैं उस की सारी यादें सुलगाना चाहता हूँ

Pritam sihag

6 likes

ये तुम रोज़ किस दरिया में बह रहे हो ये दिल ख़ाली है, तुम कहाँ रह रहे हो ये मैं हूँ कि ग़म में लिखे जा रहा हूँ वो कहते हैं अच्छी ग़ज़ल कह रहे हो

Pritam sihag

6 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Pritam sihag.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Pritam sihag's sher.