अपना मक़ाम है यहाँ हर एक से जुदा शीशे को छोड़ दीजिए पानी में देखिए
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
Fahmi Badayuni
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बात ही कब किसी की मानी है अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी ये कलाई ये जिस्म और ये कमर तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी
Jaun Elia
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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ये जिस जहान में बे-ख़्वाबी ले के जाती है वहाँ पे चाहने वाले रुलाए जाते हैं
Vikas Rajput
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तुम ने ही इस को और भी प्यारा बनाया है जिस राब्ते को मैं ने सहारा बनाया है
Vikas Rajput
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मौसम तो और भी हैं तेरी यादों के मगर दुख के उरूज पर यूँँ ही मोती रहेगी शाम
Vikas Rajput
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विकास खिड़कियों से देख आए आसमाँ तुम कशिश थी फूल की तो हौसला भी होना था
Vikas Rajput
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तू ने जिस भाव से चादर हमें पकड़ाई है अब यहाँ पाँव पसारे भी नहीं जा सकते
Vikas Rajput
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