अपने हिस्से की मोहब्बत बाँट कर ख़ैरात में चल दिए ख़ैरात में हम फिर मोहब्बत माँगने
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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ये ग़ुरूर-ए-दौलत टिकता नहीं ज़ियादा दिन लोग चाहते हैं अब राज हो मुहब्बत का
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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अगर जो साथ है तेरा,मुझे किस बात की चिंता नसीबों से जो है मिलता,है भाई तू वही हीरा
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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सुनो जानाँ तुम आओ तो दिसंबर तक चली आना गुज़र जाए न अब की जनवरी भी हिज्र में जानाँ
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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बेटे जो भेजे हैं सरहद से बुला लो साहब कोख माँओं की उजड़ने से बचा लो साहब
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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ज़मीं सर पे उठा लूँगा उस इक लड़की की ख़ातिर मैं गगन को भी कुचल दूँगा उस इक लड़की की ख़ातिर मैं भला औक़ात क्या इस चाँद की उस चाँद के आगे हज़ारों चाँद वारूँगा उस इक लड़की की ख़ातिर मैं
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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