ये ग़ुरूर-ए-दौलत टिकता नहीं ज़ियादा दिन लोग चाहते हैं अब राज हो मुहब्बत का
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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हम को नीचे उतार लेंगे लोग इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
Zia Mazkoor
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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ज़मीं सर पे उठा लूँगा उस इक लड़की की ख़ातिर मैं गगन को भी कुचल दूँगा उस इक लड़की की ख़ातिर मैं भला औक़ात क्या इस चाँद की उस चाँद के आगे हज़ारों चाँद वारूँगा उस इक लड़की की ख़ातिर मैं
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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साथ हँसने लगे वो हँसी चाहिए उम्र भर के लिए बस यही चाहिए बिन तेरे हो अगर चार दिन ज़िंदगी एक पल भी नहीं ज़िंदगी चाहिए
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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बात कहनी थी ये बस उसी का हूँ मैं हर घड़ी याद में उस की रोता हूँ मैं सुन रही हो इसी भीड़ में वो मुझे बस इसी आस में गीत गाता हूँ मैं
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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जिस तरह से निकाले गए आज हम दर्द अपना कहें तो किसे आज हम ज़िंदगी के सिखाए थे मतलब जिन्हें क़त्ल उन के ही हाथों हुए आज हम
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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अगर जो साथ है तेरा,मुझे किस बात की चिंता नसीबों से जो है मिलता,है भाई तू वही हीरा
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
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