ऐ जानेमन इस को फ़क़त तोहफ़ा न समझो टेड्डी बियर में दिल छुपा कर दे रहे हैं
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लोग औरत को फ़क़त जिस्म समझ लेते हैं रुह भी होती है उस में ये कहाँ सोचते हैं
Sahir Ludhianvi
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ये आरज़ू भी बड़ी चीज़ है मगर हमदम विसाल-ए-यार फ़क़त आरज़ू की बात नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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पुरानी कश्ती को पार ले कर फ़क़त हमारा हुनर गया है नए खेवइये कहीं न समझें नदी का पानी उतर गया है
Uday Pratap Singh
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उस मेहरबाँ नज़र की इनायत का शुक्रिया तोहफ़ा दिया है ईद पे हम को जुदाई का
Unknown
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मैं रस्मन कह रहा हूँ ''फिर मिलेंगे'' ये मत समझो कि वा'दा कर रहा हूँ
Zubair Ali Tabish
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सीने में तो काँटे ही नहीं हैं दिल में फिर ये चुभन क्यूँ है माना कि ख़ुदा है साथ मेरे फिर भी ये अकेलापन क्यूँ है
Adnan Ali SHAGAF
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जब कभी ज़ख़्म तेरे भरने लगें याद करना मुझे अकेले में
Adnan Ali SHAGAF
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ख़ुदा के दर से तुझे इस अदास माँगा है कि हाथ उठा के नहीं सर झुका के माँगा है
Adnan Ali SHAGAF
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हक़ीक़त में नहीं हूँ ख़ूबरू उतना मगर तस्वीर में अच्छा लगूँगा मैं
Adnan Ali SHAGAF
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ये तेरा हुस्न उफ़ पल पल मुझे घाइल ही करता है तेरे ही इश्क़ का बस है करम जो मैं कि ज़िंदा हूँ मुझे आवाज़ दे दे तो मैं आख़िर क्यूँ न आऊँगा अरे मैं तो तेरा पाला हुआ आशिक़ परिंदा हूँ
Adnan Ali SHAGAF
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