bahan ka pyar man ki mamta do chikhti aankhen yahi tohfe the wo jin ko main aksar yaad karta tha
Related Sher
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
354 likes
कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
163 likes
यूँँ जो तकता है आसमान को तू कोई रहता है आसमान में क्या
Jaun Elia
164 likes
हिम्मत, ताकत, प्यार, भरोसा जो है सब इनसे ही है कुछ नंबर हैं जिन पर मैं ने अक्सर फोन लगाया है
Pratap Somvanshi
96 likes
हार हो जाती है जब मान लिया जाता है जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है
Shakeel Azmi
174 likes
More from Munawwar Rana
ख़ामुशी कब चीख़ बन जाए किसे मालूम है ज़ुल्म कर लो जब तलक ये बे-ज़बानी और है
Munawwar Rana
0 likes
सज़ा कितनी बड़ी है गाँव से बाहर निकलने की मैं मिट्टी गूँधता था अब डबलरोटी बनाता हूँ
Munawwar Rana
19 likes
न जाने कैसी महक आ रही है बस्ती से वही जो दूध उबलने के बा'द आती है
Munawwar Rana
19 likes
अब आप की मर्ज़ी है सँभालें न सँभालें ख़ुश्बू की तरह आप के रूमाल में हम हैं
Munawwar Rana
26 likes
उस की तरफ़ से फूल भी आएँगे एक रोज़ पत्थर उठा के चूम ले इस को पहल समझ
Munawwar Rana
32 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Munawwar Rana.
Similar Moods
More moods that pair well with Munawwar Rana's sher.







