बे-सबब हम ने लुटाया भी बहुत होता है मुफ़्त का माल है, ज़ाया' भी बहुत होता है ये शजर जिन को मुयस्सर नहीं उन सेे पूछो बाप का फल नहीं साया भी बहुत होता है
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है
Tehzeeb Hafi
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प्रेम की गली में सब शराब ले कर आए थे हम बहुत ख़राब थे किताब ले कर आए थे
Aman Akshar
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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सब्र आने की देर है वरना तू भी दिल से उतर ही जाएगा
Wajid Husain Sahil
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वो शख़्स जो नज़रों से बहुत दूर है लेकिन पहरो उसे तकता हूँ मैं ख़्वाबों में बुला कर
Wajid Husain Sahil
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ख़िरद ने दी जो दबिश मेरे दफ़्तरे-दिल पर तेरा ख़याल मिला है मेरे ठिकानों से
Wajid Husain Sahil
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वो हाथों से निकलते जा रहे हैं जिन्हें सर पे बिठाना चाहता हूँ
Wajid Husain Sahil
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ख़्याल बन के ज़माने को याद आएँगे हम ऐसे शख़्स कहाँ, जो भुला दिए जाएँ
Wajid Husain Sahil
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