बिन किए उन सेे मुलाक़ात नहीं मानेगा दिल तो पागल है कोई बात नहीं मानेगा
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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यूँँ इन आँखों को तड़पने की सज़ा दी उस ने अपनी तस्वीर ही डीपी से हटा दी उस ने
Wajid Husain Sahil
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वो शख़्स जो नज़रों से बहुत दूर है लेकिन पहरो उसे तकता हूँ मैं ख़्वाबों में बुला कर
Wajid Husain Sahil
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उस ने माँगा नहीं कुछ और जुदाई के सिवा लेकिन अब उस को मैं इनकार नहीं कर सकता
Wajid Husain Sahil
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सब्र आने की देर है वरना तू भी दिल से उतर ही जाएगा
Wajid Husain Sahil
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मेरी आमद से भला क्यूँ आइने डरने लगे मेरे हाथों में तो साहिल कोई पत्थर भी नहीं
Wajid Husain Sahil
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