चल रहे थे रुक गए कुछ सोच कर क्यूँ रुके ये सोच कर के चल दिए
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हम को नीचे उतार लेंगे लोग इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
Zia Mazkoor
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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तुम उन के वा'दे का ज़िक्र उन से क्यूँँ करो 'ग़ालिब' ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं
Mirza Ghalib
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तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है
Munawwar Rana
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मुझ को भी उन्हीं में से कोई एक समझ ले कुछ मसअले होते हैं ना जो हल नहीं होते
Ali Zaryoun
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मुलाक़ात है तो मुलाक़ात है मोहब्बत न समझो मुलाक़ात को
Abuzar kamaal
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दुनिया की ऐश गाह से अनजान कर गया हिन्दू नमाज़ी मुझ को मुसलमान कर गया
Abuzar kamaal
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लगाता हूँ जब तो गैरों से दिल लगाता हूँ मैं नहीं लगाता तो अपनो को मुँह नहीं लगाता
Abuzar kamaal
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साथ चलना पीछे से कीचड़ उड़ाना ये हुनर सीखा है क्या चप्पल से जानाँ
Abuzar kamaal
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बस इतनी सी ख़्वाहिश है टेबल, कॉफ़ी, मैं और तुम
Abuzar kamaal
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