चंदा उतरा ग़ैरों की छत छत पर मेरी बादल निकले बस बुझ कर ही बैठे थे हम चलते ही फिर से जल निकले
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मेरी दुनिया उजड़ गई इस में तुम इसे हादसा समझते हो आख़िरी रास्ता तो बाक़ी है आख़िरी रास्ता समझते हो
Himanshi babra KATIB
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मैं जब मर जाऊँ तो मेरी अलग पहचान लिख देना लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना
Rahat Indori
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मेरी तन्हाई देखेंगे तो हैरत ही करेंगे लोग मोहब्बत छोड़ देंगे या मोहब्बत ही करेंगे लोग
Ismail Raaz
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गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए
Tehzeeb Hafi
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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ज़िंदगी से एक दिन मैं ने कहा था प्यार है ज़िंदगी ने बात मेरी दोस्ती पर रोक दी
Divya 'Kumar Sahab'
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ध्यान रखना चुप न हो जाए कहीं वो हक़ जता कर जो तुझे समझा रहा है
Divya 'Kumar Sahab'
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आज इक बहती नदी को मोड़ कर के देखा है वक़्त के इस बाँध को अब तोड़ कर के देखा है जब लिखा था वो लगा था सिर्फ़ राधा कृष्ण सा बस हमारा नाम मैं ने जोड़ कर के देखा है
Divya 'Kumar Sahab'
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ये नहीं हैं शब्द केवल जो भी तुम ये सुन रही सिर्फ़ लिखते ही नहीं अब, बोलते हम हैं तुझे
Divya 'Kumar Sahab'
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हम होते भी इक कैसे फिर, वो है जोगन, पाखंडी मैं आँखों से फिर ऐसा पकड़ा, उस का दिल था और बंदी मैं
Divya 'Kumar Sahab'
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