chehre se jhad pichhle baras ki kuduraten diwar se purana calender utar de
Related Sher
वो मेरे चेहरे तक अपनी नफरतें लाया तो था मैं ने उस के हाथ चू में और बेबस कर दिया
Waseem Barelvi
101 likes
मैं हर शख़्स के चेहरे को बस इस उम्मीद से तकता हूँ शायद से मुझ को दो आँखें तेरे जैसी दिख जाएँ
Siddharth Saaz
38 likes
हमें पढ़ाओ न रिश्तों की कोई और किताब पढ़ी है बाप के चेहरे की झुर्रियाँ हम ने
Meraj Faizabadi
50 likes
खु़शियाँ बरस पड़ें तो कभी हों उदासियाँ ये सिर्फ़ तेरे होने न होने की बात है
Siddharth Saaz
36 likes
बाक़ी न दिल में कोई भी या रब हवस रहे चौदह बरस के सिन में वो लाखों बरस रहे
Ameer Minai
28 likes
More from Zafar Iqbal
वो सूरत देख ली हम ने तो फिर कुछ भी न देखा अभी वर्ना पड़ी थी एक दुनिया देखने को
Zafar Iqbal
0 likes
ख़ुद को तरतीब दिया आख़िर-ए-कार अज़-सर-ए-नौ ज़िंदगी में तेरा इन्कार बहुत काम आया
Zafar Iqbal
0 likes
काम आई न कुछ दानिश-ओ-दानाई हमारी हारी है तेरे झूठ से सच्चाई हमारी यूँँ है कि यहाँ नाम-ओ-निशाँ तक नहीं तेरा और तुझ से भरी रहती है तन्हाई हमारी
Zafar Iqbal
6 likes
तुम ही बतलाओ कि उस की क़द्र क्या होगी तुम्हें जो मोहब्बत मुफ़्त में मिल जाए आसानी के साथ
Zafar Iqbal
0 likes
सफ़र पीछे की जानिब है क़दम आगे है मेरा मैं बूढ़ा होता जाता हूँ जवाँ होने की ख़ातिर
Zafar Iqbal
27 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Zafar Iqbal.
Similar Moods
More moods that pair well with Zafar Iqbal's sher.







