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चॉकलेट खाकर समझ आया मुझे ये देर में स्वाद अच्छा है तिरे होंठों से अच्छा कुछ नहीं

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उस ने मेरी आँखों पर चुपके से आ कर हाथ रखे इक चुम्बन होंठों पर ले कर यूँँ सारे जज़्बात रखे देख तुम्हें बस मेरे मन से एक दुआ ये उठती है मालिक इस जीवन भर मुझ को यार तुम्हारे साथ रखे

Prashant Arahat

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पिता बचपन में मिट्टी के खिलौने ला के देते थे उन्हें मालूम था आगे सबक़ ये काम आएगा

Prashant Arahat

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ज़माना ढूँढ़ता रहता है भौतिक साधनों में ही मगर मुझ को बताओ ये ख़ुशी अंदर छुपाई क्यूँ

Prashant Arahat

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लड़की एक मिली है मुझ को देख जिसे सब लोग कहें जिस के पीछे तुम पागल थे उस सेे दुगुनी अच्छी है

Prashant Arahat

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सितम ये है हमें वो आज आवारा समझते हैं जिन्हें हम आज भी सच में बहुत प्यारा समझते हैं हमारे दिल के सागर में कभी तुम डूबकर देखो इसे तो बे–वजह ही लोग बस ख़ारा समझते हैं

Prashant Arahat

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