ज़माना ढूँढ़ता रहता है भौतिक साधनों में ही मगर मुझ को बताओ ये ख़ुशी अंदर छुपाई क्यूँ
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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उस ने मेरी आँखों पर चुपके से आ कर हाथ रखे इक चुम्बन होंठों पर ले कर यूँँ सारे जज़्बात रखे देख तुम्हें बस मेरे मन से एक दुआ ये उठती है मालिक इस जीवन भर मुझ को यार तुम्हारे साथ रखे
Prashant Arahat
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चॉकलेट खाकर समझ आया मुझे ये देर में स्वाद अच्छा है तिरे होंठों से अच्छा कुछ नहीं
Prashant Arahat
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छोड़ गई है मुझ को तो इस की कोई परवाह नहीं उस सेे अच्छी लड़की से अब इश्क़ हमारा चलता है
Prashant Arahat
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उगाई फ़स्ल मैं ने थी बड़ी मेहनत लगाकर के मगर बेवक़्त बारिश ने तबाही सी मचाई है
Prashant Arahat
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विसाले यार होती है यहाँ हर रोज़ ख़्वाबों में तभी मिलने की अब तुम सेे कोई ख़्वाहिश नहीं होती
Prashant Arahat
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