दर्द जब हद से गुज़र जाता है वो मुझे याद बहुत आता है
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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जब भी मिलते हैं तहे दिल से दुआ देते हैं ऐसे होते हैं मोहब्बत को निभाने वाले
Gulshan
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मुरझा गया गुलाब तो अफ़सोस ये हुआ नाहक़ जुदा किया उसे शाख़ों से तोड़ कर
Gulshan
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बड़ा चालाक बनकर के मेरी ता'रीफ़ करता था ज़रूरत से अधिक ता'रीफ़ भी अच्छी नहीं होती
Gulshan
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झूठा न बोलिए मुझे झूठा नहीं हूँ मैं कह तो रहा था आपसे अच्छा नहीं हूँ मैं
Gulshan
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ख़ुदा ही जानता है अपनी मर्ज़ी वो किस कतरे को कब दरिया करेगा
Gulshan
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