दिल मेरा लूट के कहते हैं वो भोले पन से हाल क्यूँ अपना दिवानों सा बना रक्खा है
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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वो शख़्स जो नज़रों से बहुत दूर है लेकिन पहरो उसे तकता हूँ मैं ख़्वाबों में बुला कर
Wajid Husain Sahil
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सब्र आने की देर है वरना तू भी दिल से उतर ही जाएगा
Wajid Husain Sahil
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यूँँ इन आँखों को तड़पने की सज़ा दी उस ने अपनी तस्वीर ही डीपी से हटा दी उस ने
Wajid Husain Sahil
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ज्ञान पर अभिमान का जो इक उदाहरण हो गया और फिर अपने पतन का ख़ुद ही कारण हो गया क्या अजब इस में कि इक रावण था जो ज्ञानी हुआ पर अजब तो ये है इक ज्ञानी भी रावण हो गया
Wajid Husain Sahil
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खुल के मैदाँ में आ सकोगे क्या इतनी हिम्मत जुटा सकोगे क्या अपने पंजों के बल खड़े हो कर तुम मेरा क़द घटा सकोगे क्या
Wajid Husain Sahil
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