एक नया आशिक़ है उस का, जान छिड़कता है उसपर मुझ को डर है वो भी इक दिन मय-ख़ाने से निकलेगा
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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तू बुझा कर रख गया था जबसे इस दिल के चराग़ हम ने इस घर में नहीं की रौशनाई आज तक
Siddharth Saaz
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इन्हीं रस्तों पे हम तुझ सेे मिले थे इन्हीं रस्तों पे तुझ को खो रहे हैं
Siddharth Saaz
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ग़ज़ल पूरी न हो चाहे, मग़र इतनी सी ख़्वाहिश है मुझे इक शे'र कहना है तेरे रुख़्सार की ख़ातिर
Siddharth Saaz
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दिल-ए-सोज़ाँ को भी महका रहे हैं हमें जो ख़्वाब तेरे आ रहे हैं तेरे शैदाई पागल हो चुके हैं तिरी तस्वीर चू में जा रहे हैं
Siddharth Saaz
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चारा-गर तो तभी बचा पाएँगे ना चारा-गर की जान बचाओ पहले तो
Siddharth Saaz
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