एक ये भी तल्ख़ सच है ज़िंदगी का मेरे दोस्त शख़्स कोई सिर्फ़ मेरा तो कभी होता नहीं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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परेशानी कभी मेरी बिना बोले समझ जाओ ज़बाँ से हर दफ़ा बोलूँ ज़रूरी तो नहीं है ना
AMAN RAJ SINHA
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जो देखते थे दुनिया मेरी आँखों से कभी ऑंखें वही दिखा रहे हैं मुझ को आजकल
AMAN RAJ SINHA
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यूँ देख कर तुझ को यही लगता है अब मासूमियत के तू ने पर्दे ओढ़े हैं
AMAN RAJ SINHA
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मरता नहीं है अब यहाँ कोई किसी के वास्ते था वक़्त जब वादों के ख़ातिर लोग मर तक जाते थे
AMAN RAJ SINHA
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वो मुझ को जिस तरह से दुआएँ था दे रहा मैं तो समझ गया ये क़यामत की रात हैं
AMAN RAJ SINHA
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