ग़ज़लें कहने में होती है वो तक़लीफ़ जैसे के औरत को बच्चा होता है
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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तुम सेे मिल कर हम ने जाना दिल तोड़ा भी जा सकता है
Vijay Anand Mahir
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सब-के-सब तेरे ही तो बंदे हैं इक बराबर दे बांटने वाले
Vijay Anand Mahir
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हाल अपना छुपा नहीं पाते लोग जो मुस्कुरा नहीं पाते घर हमारा जला दिया के हम घर किसी का जला नहीं पाते
Vijay Anand Mahir
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सुना जब से कभी हम भी थे मछली मोहब्बत हो गई 'माहिर' नदी से
Vijay Anand Mahir
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इक कमी रह गई इबादत में सर झुकाया नहीं मोहब्बत में
Vijay Anand Mahir
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