ग़ालिब की कहानी पढ़ कर के मुझ को भी ऐसा लगता है कि बा'द मेरे अब मरने के ही शोहरत मेरी जन्मेगी
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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ये दुनिया जो अपनों को भी याद नहीं अब करती है मुझ को याद रखेगी इस उम्मीद पे ही दम तोड़ा हूँ
SHIV SAFAR
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वो अब मेरा नहीं ये मानना आसाँ यूँँ हो जाए बराबर एक्स के कुछ मान लेना जितना आसाँ था
SHIV SAFAR
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तुम्हें इन बाहों में भरकर ख़ुशी से झूम लूॅंगा मैं अगर तुम ने जो कुछ पूछा क़सम से चूम लूॅंगा मैं
SHIV SAFAR
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मुझे बेवजह सा है लग रहा जो गुलों पे छाया शबाब है जो न तेरे बालों में लग सका वो गुलाब क्या ही गुलाब है
SHIV SAFAR
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जब तक मैं ज़िंदा हूँ बस तब तक ही बुराई सह लो मेरी मरने के बा'द तो वैसे भी अच्छा कहलाने वाला हूँ
SHIV SAFAR
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