ग़ुलामी की अगर जो बात आ जाए क़सम है यार मर या मार जाएँगे
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ज़मीं भी सूख जाती है हमारे ही दिलों की यूँँ हमें देखे तरस तो फिर तरस को भी तरस आए
Raunak Karn
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ज़माना देख लेगा कौन हैं हम वक़्त आने पर अभी ख़ुद को जलाऍंगे अभी ख़ुद को तपाऍंगे अभी तो जा रहे हैं डूब कर के मात खाने को मगर इक रोज़ रौनक़ बनके हम भी लौट आऍंगे
Raunak Karn
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रहे हैं ग़म सही में यार अपने बेघरी से अब हमारा दिल अभी बच्चा, इसे क्या फ़रवरी से अब
Raunak Karn
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जो तेरी मर्ज़ी पड़े कर दे अता क्या दुआ तू बद-दुआ देना मुझे शा'इरी अच्छी रहे इस के लिए तू ख़ुदा इक बे-वफ़ा देना मुझे
Raunak Karn
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कभी दिल भी कभी घर भी कभी ख़ंजर बदलता है वही तो यार मेरा था वही मंज़र बदलता है हमें सिखला रहा है वो अरे अब प्यार की बातें वही जो दो दिनों में ही सभी दिलबर बदलता है
Raunak Karn
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