ज़मीं भी सूख जाती है हमारे ही दिलों की यूँँ हमें देखे तरस तो फिर तरस को भी तरस आए
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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जौन' उठता है यूँँ कहो या'नी 'मीर'-ओ-'ग़ालिब' का यार उठता है
Jaun Elia
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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
Bashir Badr
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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ज़माना देख लेगा कौन हैं हम वक़्त आने पर अभी ख़ुद को जलाऍंगे अभी ख़ुद को तपाऍंगे अभी तो जा रहे हैं डूब कर के मात खाने को मगर इक रोज़ रौनक़ बनके हम भी लौट आऍंगे
Raunak Karn
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ज़ख़्म तो क़ीमती नेमत है तू ये माना कर ज़ख़्म सीने से लगाएगा तो छा जाएगा जब नहीं करता है कुछ तो है तू इतना आला ख़ुद को पागल जो बनाएगा तो छा जाएगा
Raunak Karn
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नहीं कहते किसी से भी अभी तकलीफ़ हम अपनी हमें मालूम है सुन कर सभी ठट्ठा उड़ाऍंगे
Raunak Karn
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यहाँ बिसयार मेरे यार बैठे हैं सही बोला यहाँ दिलदार बैठे हैं हमें सिगरेट आता है जलाना अब गया है लग पता कर प्यार बैठे हैं
Raunak Karn
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यहाँ तो वक़्त पे रिश्ता निभाता तो नहीं है अब ज़िया की बात हो फिर भी बताता तो नहीं है अब
Raunak Karn
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