गुलाबी होंट भी नज़दीक थे पर, हमारे होंट ने माथा छुआ था हमारी प्यास भी सब सेे अलग थी, हमारा ज़ब्त भी सब सेे जुदा था
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इतनी जल्दी क्या रहती है मिलने की सूट गुलाबी और दुप्पटा काला है
Tanoj Dadhich
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तो देख लेना हमारे बच्चों के बाल जल्दी सफ़ेद होंगे हमारी छोड़ी हुई उदासी से सात नस्लें उदास होंगी
Danish Naqvi
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ये मयकशों का तवाज़ुन भी क्या तवाज़ुन है खड़े भी रहना सहूलत से लड़खड़ाना भी हमारे शहर के लोगों को ख़ूब आता है किसी को सर पे बिठाना भी और गिराना भी
Imran Aami
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इस शहर में जीने के अंदाज़ निराले हैं होंटों पे लतीफ़े हैं आवाज़ में छाले हैं
Javed Akhtar
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हम ने नींदों से भी गुरेज किया तुम बड़ा ख़्वाब थे हमारे लिए
Subhan Asad
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मेरा बटुआ नहीं होता है ख़ाली तेरी तस्वीर की बरकत रही माँ
Satya Prakash Soni
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सुखाई जा रही है जुल्फ़ धो कर घटा या'नी निचोड़ी जा रही है
Satya Prakash Soni
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चिट्ठी लिखने में इक मुद्दत लगती है पढ़ने वाला मिनटों में पढ़ लेता है
Satya Prakash Soni
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नई दुनिया बनाऊँगा मगर मैं अपनी दुनिया का ख़ुदा भी इश्क़ में खोया हुआ लड़का बनाऊँगा
Satya Prakash Soni
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छत पे सिगरेट ले के बैठा है चाँद भी बे-क़रार है शायद
Satya Prakash Soni
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