चिट्ठी लिखने में इक मुद्दत लगती है पढ़ने वाला मिनटों में पढ़ लेता है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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गुलाबी होंट भी नज़दीक थे पर, हमारे होंट ने माथा छुआ था हमारी प्यास भी सब सेे अलग थी, हमारा ज़ब्त भी सब सेे जुदा था
Satya Prakash Soni
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मेरा बटुआ नहीं होता है ख़ाली तेरी तस्वीर की बरकत रही माँ
Satya Prakash Soni
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नई दुनिया बनाऊँगा मगर मैं अपनी दुनिया का ख़ुदा भी इश्क़ में खोया हुआ लड़का बनाऊँगा
Satya Prakash Soni
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सुखाई जा रही है जुल्फ़ धो कर घटा या'नी निचोड़ी जा रही है
Satya Prakash Soni
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छत पे सिगरेट ले के बैठा है चाँद भी बे-क़रार है शायद
Satya Prakash Soni
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