छत पे सिगरेट ले के बैठा है चाँद भी बे-क़रार है शायद
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चाँद चेहरा ज़ुल्फ़ दरिया बात ख़ुशबू दिल चमन इक तुम्हें दे कर ख़ुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे
Bashir Badr
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इसी से जान गया मैं कि बख़्त ढलने लगे मैं थक के छाँव में बैठा तो पेड़ चलने लगे मैं दे रहा था सहारे तो इक हुजूम में था जो गिर पड़ा तो सभी रास्ता बदलने लगे
Farhat Abbas Shah
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तुम इस का नुक़सान बताती अच्छी लगती हो वरना हम को शौक़ नहीं है सिगरेट-नोशी का
Khurram Afaq
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तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है तेरे आगे चाँद पुराना लगता है
Kaif Bhopali
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हवा चली तो उस की शॉल मेरी छत पे आ गिरी ये उस बदन के साथ मेरा पहला राब्ता हुआ
Zia Mazkoor
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सुखाई जा रही है जुल्फ़ धो कर घटा या'नी निचोड़ी जा रही है
Satya Prakash Soni
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मेरा बटुआ नहीं होता है ख़ाली तेरी तस्वीर की बरकत रही माँ
Satya Prakash Soni
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गुलाबी होंट भी नज़दीक थे पर, हमारे होंट ने माथा छुआ था हमारी प्यास भी सब सेे अलग थी, हमारा ज़ब्त भी सब सेे जुदा था
Satya Prakash Soni
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नई दुनिया बनाऊँगा मगर मैं अपनी दुनिया का ख़ुदा भी इश्क़ में खोया हुआ लड़का बनाऊँगा
Satya Prakash Soni
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चिट्ठी लिखने में इक मुद्दत लगती है पढ़ने वाला मिनटों में पढ़ लेता है
Satya Prakash Soni
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