है इन दियों का मुक़द्दर भी बेटियों जैसा कहाँ बनाए गए और हुए कहाँ रौशन
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ये कभी मिलने चले आऍंगे सदियों बा'द भी वक़्त के पन्नों में कुछ लम्हात रख कर देखिए
nakul kumar
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अकेलेपन से कहाँ तालमेल होता है खिलाड़ी इश्क़ में दो हों तो खेल होता है न लेना इश्क़ के पर्चे में सौ से कम नंबर यहाँ निनानवे वाला भी फेल होता है
Rehman Faris
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मेरा किरदार मेरी बात कहाँ सुनता है ये समझदार मेरी बात कहाँ सुनता है इश्क़ है वादा-फ़रामोश नहीं है कोई दिल तलबगार मेरी बात कहाँ सुनता है
Vishal Singh Tabish
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उठाओ कैमरा तस्वीर खींच लो इन की उदास लोग कहाँ रोज़ मुस्कराते हैं
Malikzada Javed
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इस से पहले कि तुझे और सहारा न मिले मैं तिरे साथ हूँ जब तक मिरे जैसा न मिले
Afkar Alvi
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बे-वजह क्यूँँ मिरे दिल तू धकधक करे इक नज़र दर पे और इक घड़ी की तरफ़
Anjali Sahar
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दिल-ए-नादाँ तू गर नहीं होता ग़म न होता ख़ुशी नहीं होती गर हमें सब्र-ओ-ज़ब्त आ जाता अपनी जन्नत यही ज़मीं होती
Anjali Sahar
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जब से इक शख़्स छोड़ कर गया है मेरी सब सेे बड़ी ख़ुशी दुख है
Anjali Sahar
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हम सेे कटता नहीं ग़मों का पहाड़ लोग कहते हैं ज़िंदगी कम है
Anjali Sahar
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ज़िंदगी अब कुछ और नहीं दरकार मुझे अच्छी भली उदासी है
Anjali Sahar
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