हम तिरे शौक़ में यूँँ ख़ुद को गँवा बैठे हैं जैसे बच्चे किसी त्यौहार में गुम हो जाएँ
Related Sher
किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
162 likes
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
156 likes
हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
333 likes
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
More from Ahmad Faraz
वो ख़ार ख़ार है शाख़-ए-गुलाब की मानिंद मैं ज़ख़्म ज़ख़्म हूँ फिर भी गले लगाऊँ उसे
Ahmad Faraz
0 likes
हम तेरे शौक़ में यूँँ ख़ुद को गँवा बैठे हैं जैसे बच्चे किसी त्यौहार में गुम हो जाएँ
Ahmad Faraz
0 likes
अब ज़मीं पर कोई गौतम न मोहम्मद न मसीह आसमानों से नए लोग उतारे जाएँ
Ahmad Faraz
19 likes
आवाज़ दे के छुप गई हर बार ज़िंदगी हम ऐसे सादा-दिल थे कि हर बार आ गए
Ahmad Faraz
19 likes
जाने किस हाल में हम हैं कि हमें देख के लोग एक पल के लिए रुकते हैं गुज़र जाते हैं
Ahmad Faraz
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Ahmad Faraz.
Similar Moods
More moods that pair well with Ahmad Faraz's sher.







