हिज्र के दिन कट रहे हैं हिस्सों में हम घट रहे हैं देख कर ये आइना क्यूँँ सबके ग़म अब छट रहे हैं
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कहो हमें भला बुरा या कुछ भी तुम यहाँ मगर कहे जो सच वो आइना भी पास हो
Lalit Mohan Joshi
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ज़बाँ मीठी रखो या तल्ख़ तुम मगर सच कहने की आदत रखो
Lalit Mohan Joshi
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मैं भले इस बज़्म में अनजान हूँ बा'द मरने के तो गाया जाएगा
Lalit Mohan Joshi
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मुश्क आने मौत की मुझ को लगी इश्क़ दुनिया करने ही मुझ को लगी क्या कहूँ मैं ऐसी नादानी को अब प्यार में फिर छलने भी मुझ को लगी
Lalit Mohan Joshi
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फूल मुरझा अब गया है काट जब वो डाल दी है
Lalit Mohan Joshi
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