होंठ पे मुस्कान ले के सब शुमारे काट लेंगे वो न होगी उस की यादों के सहारे काट लेंगे
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तेरी गली को छोड़ के पागल नहीं गया रस्सी तो जल गई है मगर बल नहीं गया मजनूँ की तरह छोड़ा नहीं मैं ने शहर को या'नी मैं हिज्र काटने जंगल नहीं गया
Ismail Raaz
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चाँद चेहरा मुझे क़बूल नहीं अब समझने में कोई भूल नहीं आँख बस आँख ही है झील नहीं होंठ बस होंठ ही हैं फूल नहीं
Sandeep Thakur
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धूप में कौन किसे याद किया करता है पर तिरे शहर में बरसात तो होती होगी
Ameer Imam
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होंठ तबस्सुम से गीले हैं जानाँ या'नी तुम ने कुछ मीठा सोचा है
Rohit Gustakh
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चले जाओ भी अब जी लेंगे पर सच कहो मजबूरी है क्या मुझे ये कहानी कुछ और लिखनी थी तुम्हारे हिसाब से पूरी है क्या
Zubair Ali Tabish
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ज़मीं भी सूख जाती है हमारे ही दिलों की यूँँ हमें देखे तरस तो फिर तरस को भी तरस आए
Raunak Karn
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नहीं है जो दिल ने 'रौनक' सब कहा अब तक न जाने कैसे लब पे वो बात आई है
Raunak Karn
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यही तो बात है 'रौनक' यहाँ तो दर्द रहता है यहाँ तो यार तेरा आँख भी अख़गर बदलता है
Raunak Karn
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जो तेरी मर्ज़ी पड़े कर दे अता क्या दुआ तू बद-दुआ देना मुझे शा'इरी अच्छी रहे इस के लिए तू ख़ुदा इक बे-वफ़ा देना मुझे
Raunak Karn
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डर न होता छोड़ देते हाथ से दिल तोड़ देते ज़हर देकर जा रहा था मौत को भी मोड़ देते
Raunak Karn
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