हमारी हो रही चारों तरफ़ है किरकिरी शायद ख़ुशी से चूम बैठा जब तुम्हारी ओढ़नी शायद कभी बोसा कभी आँसू कभी तन्हाइयाँ देते इसी से और बढ़ती जा रही है आशिक़ी शायद
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तुम मेरी तरफ़ देखना छोड़ो तो बताऊँ हर शख़्स तुम्हारी ही तरफ़ देख रहा है
Waseem Barelvi
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हालत जो हमारी है तुम्हारी तो नहीं है ऐसा है तो फिर ये कोई यारी तो नहीं है
Ali Zaryoun
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इतना प्यारा है वो चेहरा कि नज़र पड़ते ही लोग हाथों की लकीरों की तरफ़ देखते हैं
Nadir Ariz
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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
Ahmad Faraz
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उसे पागल बनाती फिर रही हो जिसे शौहर बनाना चाहिए था
Arvind Inaayat
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मछलियाँ आ गई मुहाने पर मिरे हाथों में जाल दे कोई
Shivsagar Sahar
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दिल पे सिक्का जमा नहीं पाया इतनी हिम्मत जुटा नहीं पाया मेरी इस आशिक़ी पे लानत है उस को पागल बना नहीं पाया
Shivsagar Sahar
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तुम्हें मुझ सेे मोहब्बत हो गई है अरे पहले बताना चाहिए था
Shivsagar Sahar
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कभी तो अपनी तरफ़ भी देखो वफ़ा जो हम को सिखा रहे हो
Shivsagar Sahar
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दोस्त मजबूरियाँ नहीं होती आपसे दूरियाँ नहीं होती
Shivsagar Sahar
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