ek roz chhin legi hamin se zamin hamein chhinenge kya zamin ke khazane zamin se hum
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साथ चलते जा रहे हैं पास आ सकते नहीं इक नदी के दो किनारों को मिला सकते नहीं उस की भी मजबूरियाँ हैं मेरी भी मजबूरियाँ रोज़ मिलते हैं मगर घर में बता सकते नहीं
Bashir Badr
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दोस्ती लफ़्ज़ ही में दो है दो सिर्फ़ तेरी नहीं चलेगी दोस्त
Zubair Ali Tabish
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वो मेरी पीठ में ख़ंजर ज़रूर उतारेगा मगर निगाह मिलेगी तो कैसे मारेगा
Waseem Barelvi
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तुम ने उस रोज़ क़यामत ही उठा रक्खी थी तुम ने उस रोज़ मुझे देखते देखा होता
Tarkash Pradeep
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मैं डर रहा हूँ तुम्हारी नशीली आँखों से कि लूट लें न किसी रोज़ कुछ पिला के मुझे
Jaleel Manikpuri
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सौ बार जिस को देख के हैरान हो चुके जी चाहता है फिर उसे इक बार देखना
Saba Akbarabadi
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ग़लत-फ़हमियों में जवानी गुज़ारी कभी वो न समझे कभी हम न समझे
Saba Akbarabadi
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इक रोज़ छीन लेगी हमीं से ज़मीं हमें छीनेंगे क्या ज़मीं के ख़ज़ाने ज़मीं से हम
Saba Akbarabadi
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भीड़ तन्हाइयों का मेला है आदमी आदमी अकेला है
Saba Akbarabadi
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आप के लब पे और वफ़ा की क़सम क्या क़सम खाई है ख़ुदा की क़सम
Saba Akbarabadi
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