इक तरफ़ हुस्न-ए-तबस्सुम इक तरफ़ हुस्न-ए-हया और उस पर जान लेवा आप की अँगड़ाई है
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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तुझे याद करते करते मैं ये सोचता हूँ अक्सर तेरा हिज्र भी न हो तो मेरे पास और क्या है
Talha Lakhnavi
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तेरी हर अदा है दिलकश तेरा हुस्न दिलरुबा है तुझे जब से मैं ने देखा मुझे इश्क़ हो गया है
Talha Lakhnavi
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हम सेे जो दूर रहा करते हैं उन को अक्सर दिल की आवाज़ सुनाने को ग़ज़ल कहते है
Talha Lakhnavi
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हमें हासिल हैं दुनिया के ख़ज़ाने मगर कुछ फिर भी कम है लौट आओ
Talha Lakhnavi
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तेरी ता'रीफ़ बताने को ग़ज़ल कहते हैं हम कहाँ नाम कमाने को ग़ज़ल कहते हैं
Talha Lakhnavi
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