ilahi kya ilaqa hai wo jab leta hai angdai mere sine mein sab zakhmon ke tanke tut jate hain
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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लब-ए-ख़याल से उस लब का जो लिया बोसा तो मुँह ही मुँह में अजब तरह का मज़ा आया
Jurat Qalandar Bakhsh
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सभी इन'आम नित पाते हैं ऐ शीरीं-दहन तुझ से कभू तू एक बोसे से हमारा मुँह भी मीठा कर
Jurat Qalandar Bakhsh
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रखे है लज़्ज़त-ए-बोसा से मुझ को गर महरूम तो अपने तू भी न होंटों तलक ज़बाँ पहुँचा
Jurat Qalandar Bakhsh
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मिल गए थे एक बार उस के जो मेरे लब से लब उम्र भर होंटों पे अपने मैं ज़बाँ फेरा किया
Jurat Qalandar Bakhsh
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