इस बंजर का तुम हल बनके बरसोगे कब तुम जल बनके तुम याद करो मैं निकलूँगा परछाई से हलचल बनके
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ज़ेहन से यादों के लश्कर जा चुके वो मेरी महफ़िल से उठ कर जा चुके मेरा दिल भी जैसे पाकिस्तान है सब हुकूमत कर के बाहर जा चुके
Tehzeeb Hafi
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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था
Tehzeeb Hafi
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इसीलिए तो सब सेे ज़्यादा भाती हो कितने सच्चे दिल से झूठी क़स में खाती हो
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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आजकल अपराध झूला हो गया है इस क़दर क़ानून लूला हो गया है
Divya 'Kumar Sahab'
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अब जिगर में दर्द है तो दर्द होने दीजिए आप लड़के को बदल कर मर्द होने दीजिए
Divya 'Kumar Sahab'
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मन की मन में ही भुनाने में लगे हो हाथ में जो है निकलता जा रहा है
Divya 'Kumar Sahab'
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तुम तो कहते थे कि मैं रोता नहीं हूँ कब से इतना मुस्कुराया जा रहा है
Divya 'Kumar Sahab'
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जितने जुड़े थे ख़ून से वो तो सभी रिश्ते हुए इस के परे वो एक रिश्ता मित्रता समझा गई
Divya 'Kumar Sahab'
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