इस क़दर रोए सामने उन के फिर भी इक पल नहीं तका हम को सारे जज़्बात मर रहे हैं अब सब्र की अब बता दुआ हम को
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
545 likes
ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
508 likes
बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
211 likes
More from Saba Rao
तिरे कहने पे क्या मैं आम हो जाऊँ बिना ही बात के नीलाम हो जाऊँ
Saba Rao
0 likes
यतीमों का ख़ुदा ने घर बसाया है गरीबों को भी उन का हक़ दिलाया है ज़ुलैख़ा की तरह तू माँग मौला से जिसे दिल की तिजोरी में छुपाया है
Saba Rao
0 likes
दुनिया में सिर्फ़ तुम ही तो मेरे हबीब हो मौला का शुक्र है कि मिरे तुम नसीब हो क्यूँ जानबूझ कर मुझे तड़पाए जा रहे तुम तो क़सम से यार बड़े ही अजीब हो
Saba Rao
0 likes
सनम जिस दर्द-ए-दिल में मुब्तला है तू मैं ऐसे दर्द-ए-दिल की बाम हो जाऊँ
Saba Rao
0 likes
नाम से अब मिरे महफ़िल भी सजाने वो लगा फिर भरी महफ़िलों में नज़रें चुराने वो लगा छोड़ के आज मुझे ग़म के घराने में वो अपना अहबाब किसी और को बनाने वो लगा
Saba Rao
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Saba Rao.
Similar Moods
More moods that pair well with Saba Rao's sher.







