नाम से अब मिरे महफ़िल भी सजाने वो लगा फिर भरी महफ़िलों में नज़रें चुराने वो लगा छोड़ के आज मुझे ग़म के घराने में वो अपना अहबाब किसी और को बनाने वो लगा
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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तुम्हारे नाम की हर लड़की से मिला हूँ मैं तुम्हारा नाम फ़क़त तुम पे अच्छा लगता है
Unknown
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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तिरे कहने पे क्या मैं आम हो जाऊँ बिना ही बात के नीलाम हो जाऊँ
Saba Rao
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सनम जिस दर्द-ए-दिल में मुब्तला है तू मैं ऐसे दर्द-ए-दिल की बाम हो जाऊँ
Saba Rao
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यतीमों का ख़ुदा ने घर बसाया है गरीबों को भी उन का हक़ दिलाया है ज़ुलैख़ा की तरह तू माँग मौला से जिसे दिल की तिजोरी में छुपाया है
Saba Rao
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औरों की बातें सुन के झूठा मुझे बताया है बाग़ों में जब फूल खिले फ़ज़ा ने जश्न मनाया है
Saba Rao
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बड़ी प्यारी रही क़ुर्बत की ये दूरी मोहब्बत में तिरी गुमनाम हो जाऊँ
Saba Rao
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