जाइए अब घर पे जा के रोइए आप के बस का तमाशा भी नहीं
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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कौन कह सकता है उस को देख कर ये वही है जो हमारा था कभी
Shariq Kaifi
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बैठ कर बात की और जुदा हो गए कोई शिकवा नहीं कोई झगड़ा नहीं
Shariq Kaifi
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उसे यूँँ चेहरा-चेहरा ढूँढ़ता हूँ वो जैसे रात-दिन सड़कों पे होगा
Shariq Kaifi
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ज़माने पहले जिसे डूबना था डूब गया न जाने अब यहाँ किस को बचाने आता हूँ
Shariq Kaifi
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जितनी चाहे पी लो लेकिन ध्यान रहे तुम को घर पहुँचाने वाले अच्छे हों
Shariq Kaifi
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