जब हक़ीक़त में तुम्हें इरफ़ान-ए-ग़म हो जाएगा जिस क़दर टूटेगा ये दिल मोहतरम हो जाएगा
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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रफ़तार इतनी तेज़ थी सैलाब-ए-दर्द की आँखों के बाँध तोड़ के आँसू निकल पड़े फिर भी न आफ़ताब की गैरत को आया होश तारीकियाँ मिटाने को जुगनू निकल पड़े
Qambar Naqvi
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वक़्त जब ख़ास कोई आता है तब मिलता है ये ज़माना है ज़रूरत के सबब मिलता है
Qambar Naqvi
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ज़िन्दगी ख़त्म होने वाली है ऐसा लगता है कुछ अधूरा है
Qambar Naqvi
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बंद लफ्ज़ों में एक बात कहूँ आप जैसा कोई शरीफ़ नहीं
Qambar Naqvi
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अब रहम कोई खाएगा क्या मेरे हाल पर जब तुम ने मुझ को छोड़ दिया मेरे हाल पर मुसतक़बिल अच्छा गुज़रेगा अपना न जाने कब माज़ी भी मुस्कुराने लगा मेरे हाल पर
Qambar Naqvi
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