रफ़तार इतनी तेज़ थी सैलाब-ए-दर्द की आँखों के बाँध तोड़ के आँसू निकल पड़े फिर भी न आफ़ताब की गैरत को आया होश तारीकियाँ मिटाने को जुगनू निकल पड़े
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ख़्बाब आँखों में बंद कर लेते बात गर दिल की चंद कर लेते आप भी हो ही जाते दीवाने गर किसी को पसंद कर लेते
Sandeep Thakur
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मेरा अरमान मेरी ख़्वाहिश नहीं है ये दुनिया मेरी फ़रमाइश नहीं है मैं तेरे ख़्वाब वापस कर रहा हूँ मेरी आँखों में गुंजाइश नहीं है
Abrar Kashif
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अपने सामान को बाँधे हुए इस सोच में हूँ जो कहीं के नहीं रहते वो कहाँ जाते हैं
Jawwad Sheikh
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चल गया होगा पता ये आप को बे-वफ़ा कहते हैं लड़के आप को इक ज़रा से हुस्न पर इतनी अकड़ तू समझती क्या है अपने आप को
Kushal Dauneria
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जुदा हुए हैं बहुत लोग एक तुम भी सही अब इतनी बात पे क्या ज़िंदगी हराम करें
Nasir Kazmi
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वक़्त जब ख़ास कोई आता है तब मिलता है ये ज़माना है ज़रूरत के सबब मिलता है
Qambar Naqvi
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ज़िन्दगी ख़त्म होने वाली है ऐसा लगता है कुछ अधूरा है
Qambar Naqvi
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निकालूँ कैसे मैं दो दिन की ज़िन्दगी में वक़्त पचास काम मिरे एक दिन में रहते हैं
Qambar Naqvi
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बंद लफ्ज़ों में एक बात कहूँ आप जैसा कोई शरीफ़ नहीं
Qambar Naqvi
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बहार लब पा हँसी की न जाने कब गुज़री बगैर अश्क बहाए न कोई शब गुज़री
Qambar Naqvi
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