निकालूँ कैसे मैं दो दिन की ज़िन्दगी में वक़्त पचास काम मिरे एक दिन में रहते हैं
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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ज़िन्दगी ख़त्म होने वाली है ऐसा लगता है कुछ अधूरा है
Qambar Naqvi
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रफ़तार इतनी तेज़ थी सैलाब-ए-दर्द की आँखों के बाँध तोड़ के आँसू निकल पड़े फिर भी न आफ़ताब की गैरत को आया होश तारीकियाँ मिटाने को जुगनू निकल पड़े
Qambar Naqvi
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वक़्त जब ख़ास कोई आता है तब मिलता है ये ज़माना है ज़रूरत के सबब मिलता है
Qambar Naqvi
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जब हक़ीक़त में तुम्हें इरफ़ान-ए-ग़म हो जाएगा जिस क़दर टूटेगा ये दिल मोहतरम हो जाएगा
Qambar Naqvi
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बंद लफ्ज़ों में एक बात कहूँ आप जैसा कोई शरीफ़ नहीं
Qambar Naqvi
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